आरूषि मामला: बचाव पक्ष देगा गवाहों की सूची

आरुषि तलवार
Image caption स्कूल छात्रा आरुषि तलवार की 2008 में उनके घर में हत्या हुई थी.

बहुचर्चित आरुषि तलवार-हेमराज हत्याकांड मामले में बचाव पक्ष चार जून को अपने गवाहों की सूची अदालत के सामने पेश करेगा और 11 जून से उन गवाहों के बयान दर्ज होंगे.

इससे पहले शुक्रवार की सुबह आरुषि-हेमराज हत्याकांड के मुलज़िम तलवार दंपत्ति( राजेश तलवार और नूपुर तलवार) को कड़ी सुरक्षा के बीच सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में पेश किया गया.

सीबीआई के वकील बीके सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सीबीआई के पास मुलज़िमों के ख़िलाफ़ पुख्ता सुबूत हैं. उन्होंने अदालत से मुलज़िमों को बरी न किए जाने की अपील की और कोर्ट से आगे की कार्रवाई तय करने की गुज़ारिश की.

इसके जवाब में बचाव पक्ष के वकील तनवीर अहमद मीर, सत्यकेतु सिंह और मनोज शिशौदिया ने बहस करने से इंकार कर दिया.

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने आदेश दिया है कि बचाव पक्ष इस केस से संबंधित अपने दस्तावेज़ और गवाहों की सूची चार जून तक कोर्ट में पेश करे. इसके साथ ही अदालत ने बचाव पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए 11 जून की तारीख़ तय की.

दिल्ली के नज़दीक ग़ाज़ियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत में पिछले कुछ हफ़्तों से राजेश और नूपुर तलवार की गवाही दर्ज की जा रही है.

शुक्रवार को अदालत ने तलवार दंपत्ति से पूछा कि क्या उन्हें कुछ और कहना है, इस पर उन्होंने अपना बयान लिखित रूप में दिया.

सीबीआई का आरोप है कि आरूषि की हत्या उसके पिता राजेश तलवार ने की थी.

Image caption आरूषि की मां नूपुर तलवार अदालत से बाहर निकलते हुए.

पिछले महीने सीबीआई ने अदालत को बताया था कि आरुषि के पिता राजेश तलवार ने आरुषि और हेमराज को 'आपत्तिजनक अवस्था' में पकड़ लिया था. तब उन्होंने उन पर वार किया जिससे उनकी और आरुषि की मौत हो गई.

आरुषि के माता-पिता इन आरोपों से शुरू से ही इनकार करते रहे हैं.

मई महीने की 28 तारीख़ को सुप्रीम कोर्ट ने राजेश और नूपुर तलवार की पूर्व सीबीआई अधिकारी अरूण कुमार समेत 14 गवाहों को तलब करने की याचिका को ख़ारिज कर दिया था.

इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी 14 गवाहों को तलब करने की तलवार दंपत्ति की याचिका ठुकरा दी थी जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था.

मामला

16 मई, 2008 को 13 साल की आरुषि की हत्या तलवार दंपत्ति के नोएडा वाले घर में की गई थी.

शुरुआत में सबका शक नौकर हेमराज पर गया, लेकिन बाद में हेमराज का शव घर की छत पर मिला था.

आरुषि की हत्या का आरोप सबसे पहले पिता राजेश तलवार पर लगा था और हत्या के एक हफ्ते बाद ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले उन्हें गिरफ्तार किया और फिर रिहा कर दिया.

Image caption राजेश और नूपुर तलवार अपना पक्ष रखते हुए

इस मामले में डॉक्टर तलवार के एक सहायक और उनके जाननेवालों के घर काम करनेवाले दो नौकरों समेत तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया था और फिर छोड़ दिया गया.

बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस के काम के तरीक़े पर काफ़ी हंगामा मचा और फिर उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मायावती सरकार ने ये मामला सीबीआई को सौंप दिया.

नूपुर तलवार और उनके पति राजेश तलवार पर अपनी बेटी आरुषि और नौकर हेमराज की हत्या का आरोप है.

राजेश तलवार और नूपुर तलवार फ़िलहाल ज़मानत पर बाहर हैं. पेशे से डेंटिस्ट तलवार दंपत्ति पर हत्या और सबूतों को नष्ट करने के आरोप लगे हैं. राजेश तलवार पर जांच को गुमराह करने के भी आरोप हैं. राजेश और नूपुर तलवार अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार करते हैं.

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