वे जो अपराधियों के स्केच बनाते हैं...

  • 2 जून 2013
कलाकार अनंत का बनाया स्केच
Image caption अपने स्केच के ज़रिए अनंत जैसे कलाकार क़ानून के हाथ बनकर अपराधियों तक पहुंचते हैं

क़ानून और क़ानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल करके अपराधियों तक पहुंचना पुलिस की ज़िम्मदारी होती है.

लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में कुछ ऐसे लोग भी शामिल होते हैं जिनकी ना तो चर्चा होती है और ना पता चल पाता है कि उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है.

बीबीसी की इस ख़ास श्रंखला के तहत हम पहुंचे पेशे से एक कलाकार अनंत तक जो अपने आप में बहुत ख़ास कलाकार हैं.

ख़ास इसलिए कि वो एक प्रतिभाशाली समकालीन कलाकार होने के साथ ही सामाजिक यथार्थ पर बारीक़ी से नज़र रखते हैं और अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस की मदद करते आए हैं.

अनंत स्केच बनाते हैं जिसकी मदद से पुलिस की क्राइम ब्रांच अपराधियों को धर-दबोचती है.

अहम भूमिका

चोरी, डकैती से लेकर हत्या तक की वारदातों में जब पुलिस को अपराधियों की तलाश होती है, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगता तब अनंत की भूमिका शुरू होती है.

वह प्रत्यक्षदर्शियों से मिलते हैं, ध्यान से उनकी बातें सुनते हैं, हाव-भाव देखते हैं और अपराधी की एक छाया पकड़कर तस्वीर में ढालने की कोशिश करते हैं.

अनंत बताते हैं, ''जब आप लोगों से मिलते हैं और कोशिश करते हैं कि वो उस घटना को याद करें और बताएं कि जिस अपराधी को उन्होंने देखा, वो कैसा था, तो एकदम से तस्वीर नहीं उभरती. लोग कभी पूरी तरह से विश्वस्त नहीं होते कि वो जो कह रहे हैं, सटीक है.''

वे कहते हैं, ''कभी-कभी तो वो अपने आसपास के लोगों की ही 'इमेज' को उकेरने लग जाते हैं. शायद डर की वजह से. यह बेहद नाज़ुक वक्त होता है क्योंकि मुझे तो वहीं से कुछ पकड़ना होता है ताकि एक चेहरा उकेरा जा सके.''

दिल्ली स्कूल ऑफ़ आर्ट्स से बैचलर और फिर मास्टर ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स की पढ़ाई करने वाले कलाकार के लिए इस काम की शुरुआत कैसे हुई?

इसके जवाब में अनंत बताते हैं, ''ये बस इत्तेफ़ाक था. पढ़ाई के दौरान मेरे एक दोस्त के कुछ संबंधियों के साथ कोई घटना हुई और उसने मुझसे पूछा क्या ऐसा संभव है कि किसी के बताए लक्षणों से एक चेहरा खींचा जा सके और मैने कहा-हां ये हो सकता है.''

एक कलाकार के तौर पर प्रशिक्षण निश्चित रूप से इस काम का आधार बनता है लेकिन ये पेंटिंग बनाने जैसा नहीं है क्योंकि यहां आप ख़ुद के विचारों से नहीं जूझते.

चुनौतियां

इस पेश से जुड़ी चुनौतियों के बारे में अनंत कहते हैं, ''सबसे बड़ी चुनौती होती है कि आप घंटों बैठकर लोगों की बात सुनते हैं. कई बार इधर-उधर की बातें करते हैं और फिर मुद्दे पर आते हैं ताकि दिमाग शांति से सोच सके.''

वह कहते हैं, ''मुझे कई बार 8 से 10 तक स्केच बनाने पड़े क्योंकि हर बार चश्मदीद को पक्का भरोसा नहीं हो पाता कि ये चेहरा उस चेहरे से मिलता है या नहीं जिसकी तलाश है.''

अनंत कहते हैं कि क़ानून की मदद करने के लिहाज से एक कलाकार की भूमिका यहां बहुत महत्वपूर्ण होती है लेकिन शायद बहुत लंबे समय तक ये करना संभव नहीं, क्योंकि इसमें थोड़ा ख़तरा भी होता है और पैसों के लिहाज से स्थिति उत्साहजनक नहीं है.

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