'मुफ़्त लैपटॉप से पापा का काम आसान हो गया..'

तान्या
Image caption तान्या से ज़्यादा उनके परिवार के लोग उनका लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं.

तान्या सक्सेना की ज़िंदगी में इन दिनों सुकून है. उन्होंने पिछले वर्ष कक्षा 12 पास करके कॉलेज में प्रवेश किया है.

लखनऊ के राजाजीपुरम इलाक़े में रहने वाली 17 वर्ष की तान्या उन ख़ुशकिस्मत छात्रों में से एक हैं, जिन्हें मुफ्त में लैपटॉप मिले हैं.

उन्होंने बताया, "जब हमारे स्कूल में मुफ्त लैपटॉप मिलने की सूचना पहुंची तो हम सबको लगा पता नहीं मिलेगा भी या नहीं. लेकिन जब मिला तब यकीन ही नहीं हुआ."

अपनी ज़रूरतों पर तान्या कहतीं है, "हाँ मुझे फायदा तो है, पापा के लिए इस लैपटॉप से बिजनेस का काम आसान हो गया है. छोटा भाई भी इस पर काम करता है. लेकिन हाँ, अगर ये नहीं भी मिला होता तब भी ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि हम एक नया लैपटॉप लेने की सोच ही रहे थे."

चुनावी वादा

Image caption निकिता के पास पहले से ही घर में कंप्यूटर था.

इन दिनों सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टीं राज्य के छात्रों को चुनावों के पहले लैपटॉप और टैबलेट कंप्यूटर देने का वादा निभा रही है.

सरकार ने 15 लाख लैपटॉप और लगभग 26 लाख टैबलेट मुफ्त बांटने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

राजधानी लखनऊ के 10 हज़ार स्कूली बच्चों को मुफ्त लैपटॉप मिल चुके हैं जबकि 14,900,00 लाख हज़ार अभी कतार में हैं.

हुसैनगंज इलाक़े में रहने वाली निकिता द्विवेदी शहर के प्रतिष्ठित नेशनल कॉलेज में पढ़ती हैं.

उन्हें भी सरकार से एक नया लैपटॉप मुफ्त मिला है, लेकिन निकिता एक बात से ख़ासी नाराज़ हैं.

उन्होंने कहा, "मुफ्त लैपटॉप देने से क्या होता है? इसमें जो स्क्रीन सेवर है उसे हम कभी भी बदल नहीं सकते. लैपटॉप चालू होते ही इसमें मुलायम सिंह यादव और अखिलेश का चेहरा सामने आता है. मैं चाह कर भी इसमें अपने परिवार या पसंदीदा फ़िल्मी सितारे की तस्वीर नहीं लगा सकती".

इस्तेमाल

Image caption सरकार कहती है लैपटॉप बेचने की कोशिश पर नकेल कसी जाएगी.

हजारों करोड़ रूपए के ख़र्च पर अमल की जाने वाली इस योजना के शुरू होते ही इसके गलत इस्तेमाल पर सवाल भी उठ रहे हैं.

ख़बरों के अनुसार मुफ्त लैपटॉप की पहली खेंप बंटने के अगले दिन ही कई छात्र इन्हें बेचने के इरादे से लखनऊ की कंप्यूटर ब्लैक मार्केट पहुँच गए.

सरकार ने इस बात का पता चलते ही कड़ी कानूनी कार्रवाई का फरमान भी जारी कर दिया.

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अभिषेक मिश्रा ने इस बात को स्वीकार किया कि उनके पास भी ऐसी शिकायतें पहुंची थी.

उन्होंने बताया, "किसी भी दुकानदार ने इन्हें सस्ते दामों पर खरीदने से मना कर दिया था. बच्चों और उनके अभिवाकों को साफ़ तौर से बता भी दिया गया है कि ये पहल प्रदेश में बच्चों की विज्ञान और तकनीक से कदमताल के लिए शुरू की गई है और इसमें कोई छिपा मकसद नहीं है."

लेकिन खुद नए लैपटॉप के मालिक बने कई बच्चे इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते.

निकिता द्विवेदी ने कहा, "सभी को पता है कि करोड़ों खर्च करके हमें ये क्यों दिए गए हैं. अगले चुनावों में हम सभी वोट जो करेंगे!"

मकसद के साथ साथ सरकार के सामने अभी तो पूरे राज्य में लाखों लैपटॉप और टैबलेट कंप्यूटरों के वितरण की भी चुनौती है. असल तस्वीर तब सामने आएगी जब ग्रामीण इलाकों में इन महँगी मशीनों को मुफ्त में बांटा जाएगा.

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