मुर्गियों की जान गई, पानी खराब कर गईं

  • 5 जून 2013

राजस्थान के सीमावर्ती जिले गंगानगर में प्रशासन पिछले दो दिन से पंजाब से गंग नहर में प्रवाहित की गईं हजारों मृत मुर्गियों के शव निकालने में लगा हुआ है.

प्रशासन ये जानने का प्रयास कर रहा है कि बोरियों में बंद करके ये मुर्गियां नहर में कौन बहा रहा है.

गंगानगर प्रशासन ने पंजाब से इस बारे में मदद मांगी है और अपनी पांच टीमें नहर पर तैनात की हैं.

नहर में मरी हुई मुर्गियों की भरमार से परेशान स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किया है.

प्रशासन के मुताबिक पिछले हफ्ते भर से पंजाब की ओर से कोई गंग नहर में हर दिन बोरियों में बंद कर मुर्गियों को प्रवाहित कर रहा है.

रियासत काल में निर्मित गंग नहर पड़ोस के पंजाब में सतलज नदी के निकट हरिके बाँध से चल कर गंगानगर में दाखिल होती है.

गंगानगर के ज़िला कलेक्टर श्रीराम चोर्डिया कहते हैं कि दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी, ''हमने पांच स्थानों पर अपनी टीमें तैनात की हैं, नहर से मुर्गियों के शवों को निकलवाया जा रहा है. साथ ही हमने पंजाब में फाजिल्का और फिरोजपुर जिलों के अधिकारियों से बात की है. साथ ही जिसने भी ये कृत्य किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी."

आरोप

गंगानगर के पश्चिम में पाकिस्तान है और उत्तर में पंजाब.

सिंचाई और पीने के पानी के लिए ये जिला पंजाब के सिंचाई नेटवर्क से जुड़ा है और उस पर आश्रित है.

अधिकारियों के अनुसार पंजाब की तरफ से किसी पोल्ट्री फार्म ने अपनी मृत मुर्गियों को बोरियो में भर-भर कर नहर में बहा दिया.

गंगानगर के जिला कलेक्टर चोर्डिया ने फ़ोन पर बताया कि ऐसा लगता है कि शायद तेज़ गर्मी में मुर्गियां मर गईं होंगी और पोल्ट्री फार्म के मालिक ने इन्हें जमीन में दफ़नाने की बजाय पानी में बहा दिया.

इस नहर के आस-पास आबाद गांव और कस्बों के लोग नहर में उठती बदबू से परेशान हो गए और रविवार को सड़कों पर उतर आए.

इन लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया.

प्राचीन विरासत

Image caption इन्हीं बोरियों में मुर्गियाँ भर कर पानी में फेंकी जा रही है.

वहीं गंगानगर के तहसीलदार ब्रजलाल बताते हैं, ''पानी के नमूने लिए गये हैं ताकि ये पता किया जा सके कि कही इससे बीमारी तो नहीं फ़ैल जाएगी. साथ ही सिंचाई और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को राजस्थान और पंजाब की सरहद पर नहर पर तैनात किया गया है ताकि इस पर नजर रखी जा सके."

उन्होंने बताया कि गंगानगर में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता रिडामल सिंह को पंजाब भेज गया है.

राजस्थान में गंगानगर को धान का कटोरा कहा जाता है. लगभग पचहत्तर साल पुरानी ये नहर रियासत काल की निशानी है.

उस दौर में बीकानेर रियासत ने इस बियाबान रेगिस्तान को हरा भरा करने और पीने के पानी के लिए इस नहर का निर्माण करवाया था.

तब से ये नहर उस तरफ पंजाब से पानी लाती रही है, मगर ये पहला मौका है जब इस नहर में जल के साथ बेजान मुर्गिया बहती हुई चली आईं.

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