भारत-पाक सीमा पर फायरिंग: एक जवान की मौत

  • 7 जून 2013
Image caption भारत पाकिस्तान सीमा पर अक्सर गोलीबारी की घटनाएं होती हैं

भारत प्रशासित कश्मीर के पुंछ सेक्टर के नजदीक भारत पाक सैनिकों के बीच गोलीबारी हुई है. इसमें एक सूबेदार की मौत हो गई है.

मृत सैनिक का नाम सूबेदार बच्चन सिंह बताया गया है.

बीबीसी संवाददाता रियाज मसरुर ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि गोली पाकिस्तान स्नाइपर्स ने चलाई है.

सैनिक की मौत के बाद भारत की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई. इसके बाद दोनों ओर से करीब घंटेभर तक तगड़ी गोलीबारी हुई.

सेना के सूत्रों के हवाले से भारत के समाचार चैनलों ने इसे “घुसपैठ की कोशिश” करार दिया है.

सूत्रों के मुताबिक गोलीबारी की घटना, " एलओसी के नजदीक सौजियां सेक्टर की खालसा-टू पोस्ट पर हुई है. गोलीबारी की घटना दोपहर बाद 1.35 बजे हुई है.गोलीबारी के दौरान पाकिस्तानी सेना ने भारी मशीन गन और रॉकेट ग्रेनेट का इस्तेमाल किया. "

एक दिन पहले समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए श्री नगर स्थित 15 वीं टुकड़ी के लेफ्टीनेंट जनरल ओम प्रकाश ने कहा था, “जैसे ही पारा ऊपर चढ़ता है, बर्फ पिघलने लगती है. इसी दौरान पाकिस्तान ज्यादा से ज्यादा चरमपंथियों की घुसुपैठ की कोशिश करता है.”

(इसे भी देखें--ये कश्मीर है...)

घुसपैठ की कई घटनाएं

पिछले हफ्ते भी भारत प्रशासित कश्मीर के नौगाम इलाके में एलओसी के नजदीक गोलीबारी की खबरें आई थीं. उस घटना में भारतीय सेना के एक ब्रिगेडियर घायल हो गए थे.

हाल के दिनों में सीमा के नजदीक भारत और पाकिस्तान के बीच गोलीबारी की ये तीसरी घटना है. इस साल अब तक गोलीबारी की 12 ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं.

2012 में दोनों देशों के सीमा पर झड़प की 112 घटनाएं हुई थीं जबकि 2011 में 61 घटनाएं. सेना की ओर से दावा किया जाता है कि सीमा पर गोलीबारी मुख्यत: चरमपंथियों की घुसपैठ के लिए की जाती है.

भारत की मीडिया ने इस घटना को 'संघर्ष विराम' का उल्लंघन बताया है.

2003 में भारत और पाकिस्तान ने सीमा पर संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी. 2003--06 तक "कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर गोलीबारी की घटनाएं नहीं हुईं."

भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सीमा पर झड़प की खबर उस वक्त आई है जब पाकिस्तान में नवाज शरीफ ने हाल ही में सत्ता संभाली है.

नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली है. नवाज शरीफ भारत के साथ अच्छे संबंधों के हिमायती रहे हैं. हालांकि पाकिस्तान के चरमपंथी तत्वों को नियंत्रित करना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित होगा.

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