बस्तर के जंगलों में खौफ़ की प्रेत छाया

यहाँ हर तरफ खौफ़ छाया हुआ है. दोपहर के एक बज रहे हैं. सड़क वीरान है. ये राष्ट्रीय राजमार्ग है जो छत्तीसगढ़ को आंध्र प्रदेश से जोड़ता है.

आज इस रास्ते पर दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा है. इक्का-दुक्का दुपहिया वाहन और कुछ साइकिल सवार. बस.

अपने सर पर लकड़ियों का बोझ उठाकर पैदल चलती हुई आदिवासी महिलाएं भी सड़क से नदारद हैं. सड़क के किनारे आम और पत्ते बेचने वाले बच्चे भी कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं.

दरभा के जीरम घाटी की उस घटना को अब दो हफ्ते बीत चुके हैं. लेकिन वारदात का साया सबके दिलो-दिमाग पर छाया हुआ है.

सूनसान रास्ते

सावधानी बरतते हुए दरभा की घाटी से गुज़रते वक़्त उस जगह पर नज़र पड़ी जहाँ कई लोगों का क़त्ले-आम हुआ था.

25 मई को कांग्रेस के क़ाफिले पर माओवादियों के हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल, उनके पुत्र दिनेश, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडूम के जन्मदाता महेंद्र कर्मा सहित 28 लोग मारे गए थे.

सुरक्षा बलों नें उस गड्ढे को भर दिया है जहाँ बारूदी सुरंग का विस्फोट हुआ था. इस दुर्गम घाटी की वीरानी और दहशत ज़्यादा लग रही है. क्यों लोग यहाँ से नहीं गुज़र रहे हैं? क्यों ट्रक और दूसरे मालवाहक नहीं चल रहे हैं इस रास्ते पर?

दरभा थाने के पास वन विभाग के नाके पर बैठे एक कर्मचारी नें बताया कि सभी वाहन दंतेवाड़ा से होते हुए सुकमा और कोंटा की तरफ जा रहे हैं.

जगदलपुर से सुकमा की ये सड़क अब सिर्फ सुरक्षा बलों और जांच कर रही एनआईए की टीम के सदस्यों के लिए ही है.

घटना स्थल से लगभग दस किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांवों में भी ज़िन्दगी नज़र नहीं आती.

गोलियों से छलनी गाड़ियां

दरभा थाने के सामने गाड़ियों की लंबी कतार लगी हुई है. ये वो गाड़ियाँ हैं जिनपर माओवादियों नें हमला किया था.

इन वाहनों पर सवार कई लोग मारे गए थे. इनमें दरभा का ही रहने वाला वो 14 साल का बच्चा भी था जो कांग्रेस के काफिले के आगे-आगे ट्रक पर सवार था.

थाने के लोगों नें बताया कि काफिले पर माओवादियों नें चारों तरफ से गोलियों की बौछार कर दी थी. इसीलिए थाने के सामने गोलियों से छलनी लगभग सभी गाड़ियों की कतार दिखाई देती है.

अब रोज़ एनआईए की टीम इनकी जांच कर रही है. इन गाड़ियों में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल की गाड़ी भी शामिल है.

थाने के आस पास रहने वाले लोग कुछ भी बोलना नहीं चाहते. पुलिसवाले भी घटना के बारे में आज भी मौन हैं. पुलिसवाले मीडिया से नाराज़ हैं क्योंकि ये कहा जा रहा है कि घटना सुरक्षा में चूक का नतीजा है.

ये बात सच है कि सिर्फ कांग्रेस के नेताओं के निजी सुरक्षा गार्डों के अलावा स्थानीय पुलिस नें कांग्रेस के बड़े नेताओं की सुरक्षा के लिए अलग से कोई इंतज़ाम नहीं किया था.

आरोप

जगदलपुर से सुकमा के रास्ते पर अगर कोई अधिकारी भी सफ़र करता है तो दरभा और खास तौर पर जीरम घाटी पर सड़क के किनारे सुरक्षा बलों का पहरा रहता है ताकि अधिकारियों पर किसी भी संभावित माओवादी हमले से निपटा जा सके.

काफिले में शामिल लोगों का आरोप है कि जब घटना में बच कर भागने में कामयाब रहे लोगों नें दरभा थाना पहुँच कर मदद की गुहार लगाई. तो वहां सुरक्षा बल के जवान मौजूद नहीं थे.

कहा जा रहा है कि इस पूरे इलाके से सुरक्षा बलों के जवानों को सुकमा में तैनात किया गया था जहाँ पुलिस के आला अधिकारी माओवादियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चला रहे थे.

मुझे किसी ने बताया कि ये वही इलाका है जहाँ माओवादियों नें ओडिशा के विधायक झीना हिकाका को अपहरण के बाद जंगलों में बंधक बना कर रखा था.

तो सवाल स्पष्ट है. अगर यहाँ झीना हिकाका को बंधक बना कर रखा गया था तो फिर उनके रिहा होने के बाद इस इलाक़े में कोई अभियान क्यों नहीं चलाया गया? इस सवाल का पुलिस के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं है.

सरकार विरोधी पोस्टर

काफी वक़्त दरभा में बिताने के बाद मैं सुकमा की तरफ बढ़ता चला गया. वापस लौटते हुए सूरज ढल रहा था और सुकमा में मेरे जानने वालों नें मुझे इस रास्ते से वापस नहीं लौटने की सलाह दी.

मैं भी सुकमा से दंतेवाडा होते हुए जगदलपुर लौटने लगा. मगर ये रास्ता भी उतना सुरक्षित नहीं है. बुसरस की घाटियों में अचानक मेरी नज़र उन पोस्टरों पर पड़ी जो मेरे वहां से गुज़रने से महज़ कुछ मिनटों पहले माओवादियों द्वारा लगाए गए थे.

हांलाकि ये जोखिम भरा था मगर मेरा दिल नहीं माना और मैंने गाडी से उतारकर सड़क के किनारे लगाए तस्वीर लेनी शुरू कर दी. ऊपर पहाड़ियों पर मेरी नज़र उन लोगों पर पड़ी जिन्होंने ये पोस्टर लगाए थे.

चूँकि मेरे हाथ में कैमरा था और बीबीसी का माइक भी था, इसलिए वो लोग पहाड़ियों से ओझल हो गए.

(आगे पढ़िए: सलवा जुडूम के जन्मदाता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा की गाड़ी में सवार एक दूसरे सलवा जुडूम के नेता और बीजापुर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अजय सिंह का आँखों देखा हाल)

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