मंत्रियों को धमकाती हैं पेट्रोल लॉबियां

  • 15 जून 2013

भारत के पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है. अपने इस बयान में उन्होंने कहा है कि आयात लॉबियां चाहती हैं कि भारत ऐसा कोई निर्णय न ले जिससे 160 अरब अमरीकी डॉलर के तेल के आयात में कोई रुकावट पैदा हो.

मोइली ने बताया कि वे तेल और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि भारत के लोगों की निर्भरता आयात किए गए उत्पादों की बजाय घरेलू उत्पादों पर बढ़े.

मोइली पर भारत के कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने प्राकृतिक गैस की कीमतों में 60 फीसदी का इजाफा करने के मुद्दे को लेकर सवाल खड़े किए थे.

पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने आगे कहा, “हमारा देश में गैस और तेल जैसे प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं. मगर हम इसका उपयुक्त दोहन नहीं कर पाते. हमारे देश की नौकरशाही इसकी बड़ी वजह है.”

मोइली ने यह भी कहा कि इस दिक्कत के अलावा इस क्षेत्र में सक्रिय लॉबियां भी परेशानी खड़ी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि ये लॉबियां नहीं चाहतीं कि पेट्रोलियम पदार्थों का आयात बंद हो.

उन्होंने बातचीत में पत्रकार को बताया, “यहां लगभग हर मंत्री कई कई बार इन धमकियों का शिकार हो चुका है.”

जनता फैसला करेगी

उन मंत्रियों का नाम पूछे जाने पर मोइली ने चुप्पी साध ली. उन्होंने ऐसे किसी भी मंत्री को पहचानने से इंकार किया.

नाम के सवाल पर उन्होंने बस इतना कहा, “इतिहास खुद इसकी गवाही देगा. आम जनता इस बात का फैसला करेगी.”

वीरप्पा मोइली ने अपनी चिंता जताते हुए कहा कि यदि उचित मूल्य निर्धारण के जरिए पेट्रोलियम से जुड़े घरेलू उत्पादों में इजाफा नहीं किया जाता तो तेल के आयात में नाटकीय बढोत्तरी हो सकती है.”

“पिछले 4-5 सालों से इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है. हमें सही मूल्य निर्धारित करने होगें, वरना निवेशक इस क्षेत्र में आने से कतराने लगेंगे.”

अंत में मोइली ने भरोसा दिलाया कि वे किसी भी लॉबी के दबाव में नहीं आने वाले. वे भारत को 2030 तक पेट्रोलियम मामले में एक आत्मनिर्भर देश बनाने की अपनी कोशिशें जारी रखेंगें.

मोइली कहते हैं, “मैं मजबूर नहीं हूं और न मैं किसी से डरता हूं. मैं अपने देश के लिए कुछ करने आया हूं. अगर कोई सोचता है कि मैं उनकी धमकियों से डर जाउंगा और पेट्रोलियम क्षेत्र से संबंधित जरूरी निर्णय लेने में पीछे हट जाऊंगा, तो यह उन की बड़ी गलतफहमी है.”

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