बीजेपी ने हमें गठबंधन तोड़ने को मजबूर किया: नीतीश

  • 17 जून 2013
नीतीश कुमार-शरद यादव
Image caption जदयू ने रविवार को एनडीए गठबंधन से अलग होने का एलान किया.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी थी जिसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जद-यू) के पास गठबंधन से अलग होने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था. और अब उनके कुछ बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.

सोमवार सुबह पटना में मीडिया को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने एनडीए से अलग होने में किसी तरह की कोई जल्दबाज़ी नहीं की बल्कि गठबंधन किन मूल्यों और नीतियों के आधार पर आगे क़ायम रहेगा इसे लेकर वो अपना नज़रिया साल भर के दौरान बार-बार दुहराते रहे हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों बार-बार ये बयान दिया कि एनडीए के नेता के रूप में उन्होंने वहीं व्यक्ति मान्य होगा जो धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों पर खरा उतरे.

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नरेन्द्र मोदी का विरोध

उनके बयानों से ऐसा समझा जाता रहा कि वो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीजेपी में बढ़ते प्रभाव और संभावित तौर पर उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं.

गोवा की बैठक में नरेन्द्र मोदी को बीजेपी की चुनाव प्रचार समीति का प्रमुख बनाए जाने के बाद से ही बीजेपी- जद-यू गठबंधन को लेकर अनिश्चित्ता का दौर शुरू हो गया था.

रविवार को पटना में हुई लंबी बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने घोषणा कर दी कि जद-यू एनडीए से अलग हो रहा है.

नीतीश कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.

कई जगहों पर ये सवाल उठ रहे थे कि आज धर्मनिरपेक्षता की बात करते रहे नीतीश कुमार ने 2002 गुजरात दंगो के बाद केंदीय रेल मंत्री के पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया था.

पुराना बयान

भाजपा ने नीतीश कुमार का एक पुराना बयान भी जारी किया है जिसमें उन्होंने नरेन्द्र मोदी की तारीफ़ की है.

Image caption बिहार में गठबंधन को लेकर काफी समय से तनाव बना हुआ था.

नीतीश कुमार का तर्क है कि उस समय केंद्र मे जो सरकार थी वो एनडीए की थी, जिसके नेता अटल बिहारी वाजपेयी थे. एनडीए सरकार तब बन पाई थी जब सभी दलों ने मिलकर एनडीए का साझा कार्यक्रम तय किया था जिसमें सभी विवादित मुद्दों को है को साझा कार्यक्रम से अलग रखा गया था.

उनका कहना था कि केंद्र के मंत्री के तौर पर जब आप किसी राज्य में किसी कार्यक्रम के तहत जाते हैं तो वहां की सरकार की आलोचना नहीं करते.

जवाबदेह

उन्होंने इस बात को माना कि बीजेपी के कुछ केंद्रीय नेताओं ने उन्हें फोन कर गठबंधन में बने रहने का आग्रह किया था.

लेकिन उनका कहना था कि ये सारे नेता उनकी मूल चिंताओं पर उन्हें किसी तरह का ठोस आश्वासन देने को तैयार नहीं थे इसलिए एक राजनीतिक दल के तौर पर उन्हें अपने अगले क़दम पर विचार करना था.

उनका कहना था कि बिहार की जनता ने उन्हें कुछ मूल्यों और विचारों के आधार वोट दिया है और वो उसके प्रति जवाबदेह हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि अपने तौर उन्होंने गठबंधन को बचाने की पूरी कोशिश की, सहयोगी दल के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया जो नहीं आए, और आख़िरी कोशिश के तौर मंत्रिमंडल की बैठक भी बुलाई लेकिन मंत्रियों को उसमें आना भी न गवारा नहीं हुआ.

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