नरेंद्र मोदी नहीं जाएंगे रामलला के द्वारे

  • 18 जून 2013
नरेंद्र मोदी

गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता नरेंद्र मोदी ने अयोध्या जाने का न्यौता ठुकरा दिया है.

अयोध्या न जाने के उनके फैसले को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से उठाए गए धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे के बाद किसी नए विवाद से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान के हवाले से बताया है कि नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में प्रस्तावित 'अमृत महोत्सव' में भाग लेने से 'विनम्रता पूर्वक इनकार' कर दिया है.

राम जन्मभूमि न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के 75 वें जन्मदिन को अमृत महोत्सव के तौर पर अयोध्या में मनाया जा रहा है.

व्यस्तता

बयान में कहा गया है, "13 जून को नृत्य गोपाल दास ने मुख्यमंत्री को फोन किया था और 19 जून से 22 जून तक मनाए जाने वाले अमृत महोत्सव में भाग लेने का न्यौता दिया था. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले से तयशुदा कार्यक्रमों की व्यस्तता के कारण कार्यक्रम में उपस्थित हो पाना मुश्किल है."

Image caption अयोध्या को भाजपा के राजनीतिक एजेंडे में महत्वपूर्ण माना जाता रहा है.

मोदी ने महोत्सव में जाने में असमर्थता जाहिर करते हुए महंत नृत्य गोपाल दास को निमंत्रण देने के लिए शुक्रिया कहा और कार्यक्रम की सफलता की कामना की.

विश्व हिंदू परिषद की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रवक्ता शरद शर्मा ने सोमवार को कहा था कि मोदी के बुधवार या शुक्रवार को अयोध्या आने की संभावना है.

खबरों के मुताबिक हिंदुत्ववादी ब्रिगेड के अशोक सिंघल, प्रवीण तोगड़िया, गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ और योग गुरु रामदेव भी मोदी के स्वागत के लिए अमृत महोत्सव में उपस्थित रहने वाले थे.

आडवाणी से मुलाकात

मोदी के इस कदम को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

सहयोगी दलों की चिंताओं के मद्देनजर भाजपा पिछले कुछ सालों में राम मंदिर के मुद्दे को उठाने से बचती रही है.

जेडीयू के राजग से अलग हो जाने के बाद भाजपा की मुख्य सहयोगी पार्टियों में शिवसेना और शिरोमणि अकाली दल बचे रह गए हैं.

इस बीच नरेंद्र मोदी ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में से एक लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की.

पिछले दिनों पार्टी की कार्यकारिणी की गोवा में हुई बैठक में मोदी को भाजपा की चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपे जाने के बाद आडवाणी ने पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया था.

राजनीतिक गलियारों में यह कहा जा रहा था कि आडवाणी मोदी को यह जिम्मेदारी दिए जाने से नाराज थे.

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