उत्तराखंड : सिर्फ़ गौरीकुंड में 40 होटल बहे

उत्तराखंड
Image caption बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं लेकिन ख़राब मौसम के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

बारिश रूकने और बाढ़ के पानी में कमी आने के बाद से उत्तराखंड में हुई तबाही का अंदाज़ा धीरे-धीरे लगने लगा है. उत्तराखंड में अब तक सौ से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं और हज़ारों लोग अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं.

सरकार उन्हें वहां से निकालने और सुरक्षित जगह पर लाने की कोशिश कर रही है हालाकि क़ुदरत के क़हर के शिकार बने लोगों का आरोप है कि सरकार की तरफ़ से किए जा रहे राहत और बचाव कार्य पर्याप्त नहीं हैं.

जान-माल के नुक़सान में एक बड़ी संख्या होटल, लॉज, और घरों की है.

राज्य सरकार के अनुसार पांच सौ से ज्यादा भवन आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिलेगी आशंका है कि इस संख्या में और बढ़ोत्तरी होगी.

उत्तराखंड में बाढ़ से मची तबाही का ज़िले वार ब्यौरा.

रूद्रप्रयाग

Image caption 1882 में ली गई केदारनाथ मंदिर की ये तस्वीर.

सबसे ज़्यादा तबाही रूद्रप्रयाग ज़िले में हुई है. ग़ौरतलब है कि इसी ज़िले में केदारनाथ मंदिर हैं जहां भारी नुक़सान हुआ है. केदारनाथ मंदिर का मुख्य हिस्सा और गुंबद तो सुरक्षित है लेकिन मंदिर परिसर के आस-पास काफ़ी तबाही मची है. केदारनाथ में भारी संख्या में लोगों के मारे जाने की भी ख़बर है लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी संख्या के बारे में जानकारी नहीं है.

राज्य सरकार के ज़रिए जारी आंकड़े के मुताबिक़ बुधवार सुबह 1030 बजे तक लगभग 175 भवन पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं. गौरीकुंड में मंदाकिनी नदी के किनारे बसे लगभग 40 होटल बह गए हैं.

यहां ये बताना ज़रूरी है कि अभी वहां यात्रा का समय है और सारे होटल तीर्थयात्रियों और सैलानियों से भरे होते हैं. लिहाज़ा उनमें कितने लोग थे, कितने बच गए और कितने मारे गए, इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ भी कहना मुश्किल है.

विजय नगर और सिल्ली में नदी के किनारे बसे लगभग 20 घर पूरे बह गए हैं. गदनी में एक गेस्टहाउस बह गया है.

सोनप्रयाग का मुख्य बाज़ार पूरी तरह बह गया है.

चन्द्रापूरी के पास जीएमवीएन की हट, प्रिंस होटल और मौनिका होटल बह गए हैं.

पुलना हेमकुंड में लगभग 100 मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं. गोविंद घाट में एक हेलिकॉप्टर के भी बह जाने की ख़बर है.

गौरीकुंड-केदारनाथ का 14 किलोमीटर पैदल मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया है.

सरकार के अनुसार अभी भी 27 हज़ार लोग फंसे हुए हैं.

चमोली

Image caption 2013 में आई बाढ़ के बाद केदारनाथ मंदिर की तस्वीर.

यहां तीन मकान और एक घाट बह गए हैं जबकि एसबीआई बैंक का एक भवन क्षतिग्रस्त हो गया है. गोविन्द घाट से हेमकुंड के क़रीब तीन पुल भी टूट गए हैं.

उत्तरकाशी

यमनोत्री और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात पूरी तरह से बाधित है. खराड़ी बड़कोट में चार आवासीय मकान और आठ होटल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं.

जोशियाना में 19 मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए हैं.

यहां अभी भी लगभग 14 हज़ार लोग फंसे हुए हैं.

टिहरी

डाम्टा-क्यारी मार्ग में 18 मकान पूरी तरह से और 18 मकान आंशिक रूप से तबाह हो गए हैं. थत्यूड़ में पांच दुकानें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं.

पिथौरागढ़

धारचूला तहसील के अंतर्गत 110 गांव प्रभावित हुए हैं. आईटीबीपी और बीआरओ के दो कैम्प पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं. सोगला गांव पूरी तरह से बह गया है.

अब तक 105 आवासीय मकान भी पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं.

राज्य के दूसरे ज़िलों जैसे ऊधमसिंह नगर, चम्पावत, नैनीताल, अल्मोड़ा, देहरादून, पौड़ी, हरिद्वार, बागेश्वर में भी कुछ लोग मारे गए हैं, भवन नष्ट हुए हैं और पशुओं की हानि हुई है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें. ताज़ा अपडेट्स के लिए आप हम से फ़ेसबुक और ट्विटर पर जुड़ सकते हैं.)

संबंधित समाचार