उत्तराखंड: मरने वालों की संख्या 556 तक पहुंची

  • 21 जून 2013

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के अनुसार राज्य में आई प्राकृतिक आपदा में मारे जाने वालों की संख्या बढ़कर 556 हो गई है.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार ये संख्या 207 है मगर मुख्यमंत्री कार्यालय ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें विभिन्न ज़रियों से जो ख़बरें मिल रही हैं उसके अनुसार ये संख्या 556 हो चुकी है

इससे पहले दिन में हरिद्वार में गंगा नदी से 40 शव मिलने की पुष्टि हुई थी. वहाँ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव स्वरूप ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में ये जानकारी दी थी. इससे पहले भी वहाँ से आठ शव निकाले जा चुके थे.

स्थानीय पत्रकार धर्मेंद्र के अनुसार पत्थरों से टकराने की वजह से ज़्यादातर शव इतने क्षत-विक्षत हो गए हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल है.

एसएसपी स्वरूप ने बताया कि शवों की पहचान की कोशिश की जा रही है लेकिन उन्होंने भी इस बात को दोहराया कि ज़्यादातर शव क्षत-विक्षत हो गए हैं और उनकी पहचान मुश्किल है.

उन्होंने यह भी कहा कि जो जिन शवों की पहचान करना संभव नहीं हो पाएगा उनका डीएनए टेस्ट कराया जाएगा. एसएसपी के मुताबिक़ पानी घटने के साथ और ज़्यादा शव मिलने की आशंका है.

इस बीच उत्तराखंड में आई बाढ़ के बाद अब भी वहाँ हज़ारों लोगों के फँसे होने की आशंका है. 28 हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत कार्य चलाया जा रहा है जिसमें मिग 16 और मिग 26 भी शामिल है. केदारनाथ और गुप्तकाशी के बीच के इलाके में सबसे ज़्यादा खतरा बताया जा रहा है.

प्रदेश में तबाही के हालात बयान कर रहे हैं कि मौत का ग्राफ काफी बढ़ सकता है और शायद इस बात की वास्तविक जानकारी मिल नहीं पाएगी कि कितने लोग मारे गए है .

केदारनाथ और गौरीकुंड जैसे इलाके मलबे में दबे गए हैं और श्रीनगर,चमोली,पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री में सैकड़ों मकान, दुकान और कई पुल ध्वस्त हो गए हैं.

कई दुर्गम इलाकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है. सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ मलबा है या इस मलबे के नीचे लोग भी हैं.

राहत और बचाव कार्य

अभी राहत और बचाव कार्यों में सारा ध्यान यात्रियों को निकालने में है और जब मलबा हटाया जाएगा तो न जाने क्या मंजर होगा.

दूसरा सवाल ये है कि अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी में जिन शवों को बहते देखा गया है उनकी गिनती कहां होगी और कौन करेगा.

जो वाहन बहते हुए दिखे वो क्या खाली थे या उसमें लोग थे और अगर लोग थे तो कितने थे.

तीसरा सवाल ये है कि यात्रा रूट में फंसे जिन यात्रियों की गिनती की जा रही है वो उत्तरकाशी, गोविंदघाट, जोशीमठ और केदारनाथ जैसे अपेक्षाकत बड़े इलाकों की है और छोटी जगहों में फंसे यात्रियों की गिनती अभी भी स्पष्ट नहीं है. साथ ही ये भी कि फंसे हुए यात्री आपदा के 5 दिनों के बाद क्या स्वस्थ हालात में होंगे.

महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात से आए कई यात्रियों के परिवार वालों का अपने परिजनों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है और उनके बारे में कई तरह की आशंका जाहिर की जा रही है.

मरने वालो की संख्या

नागरिक संगठनों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि इस तबाही में मरने वालों की संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है.

उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने आरोप लगाया है कि सरकार मौत और तबाही के आंकड़े दबा रही है और इसके लिए प्रधानमंत्री के स्तर से मीडिया पर भी दबाव डाला जा रहा है.

इस बीच प्रदेश के लिए जान-माल की क्षति का आंकड़ा निरंतर बढता जा रहा है और पिथौरागढ़ और गोविंदघाट से भी बर्बादी की तस्वीर सामने आ रही है.

पिथौरागढ़ में काली नदी की बाढ़ में एनएचपीसी का 200 मेगावाट का प्लांट ध्वस्त हो गया है. गोविंदघाट का बाजार अलकनंदा में समाया हुआ

है और वहां नदी उफन रही है.

शोक

इस बीच प्रदेश सरकार ने तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है .

दावा है कि अब तक 30 हजार यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और 40 हजार यात्री अभी भी फंसे हुए हैं.

राहत और बचाव का सारा ध्यान फिलहाल यात्रियों को सुरक्षित निकालने में है .

स्थानीय लोग जिनके मकान और दुकान तबाह हो गए , इनकी सुध लेने की तरफ अभी तक ध्यान कम गया है. उनके सामने अंधेरा, आशंका और अनिश्चय है कि जीवन कब पटरी पर लौटे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार