उत्तराखंड: तबाही के छह दिन बयान करती छह तस्वीरें

Image caption (उत्तराखंड में आई आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए शुक्रवार को जम्मू में प्रार्थना करते स्कूली बच्चे )

उत्तराखंड में आई आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. अब ये संख्या आधिकारिक रूप से 556 हो गई है और यह आँकड़ा बढ़ने की आशंका है.

राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने अब तक 556 लोगों की मौत की पुष्टि की है.

मलबा हटने के साथ-साथ मरने वालों का आँकड़ा बढ़ सकता है. इस तबाही की शुरुआत 16 जून से हुई.

20 जून: पांचवां दिन

गढ़वाल के पर्वतीय इलाकों में बारिश और बाढ़ के कहर में मारे गए लोगों के 40 से ज़्यादा शव हरिद्वार में गंगा नदी से बरामद हुए हैं. आठ शव पहले ही निकाले जा चुके हैं.

ऐतिहासिक केदारनाथ मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित है लेकिन मंदिर का प्रवेश द्वार और उसके आस-पास का इलाका पूरी तरह तबाह हो चुका है.

19 जून: चौथा दिन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है, ''केदारनाथ में बुनियादी ढाँचा पूरी तरह बर्बाद हो गया है. कम से कम एक साल तक केदारनाथ यात्रा शुरू नहीं हो पाएगी. यात्रा चालू होने में दो से तीन साल का वक्त भी लग सकता है.''

कई दुर्गम इलाकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है.

उत्तराखंड में अब भी हज़ारों लोग फँसे हुए हैं. केदारनाथ और गौरीकुंड जैसे इलाक़े मलबे में दबे गए हैं और श्रीनगर, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री में सैकड़ों मकान, दुकान और कई पुल ध्वस्त हो गए हैं.

18 जून: तीसरा दिन

अभी राहत और बचाव कार्यों में सारा ध्यान यात्रियों को निकालने में है. सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी के अनुसार इसके लिए 43 हेलिकॉप्टरों की मदद से राहत कार्य चलाया जा रहा है जिनमें मिग 16 और एमआई 26 हेलिकॉप्टर भी शामिल हैं.

एमआई-26 दुनिया के सबसे बड़े हेलिकॉक्टरों में माना जाता है और इसे सामन्यतः सामान ढोने या सैनिकों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

यह हेलिकॉप्टर हवाई यात्रा के ईंधन के साथ ही निर्माण और मरम्मत के कामों के लिए सामान ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

17 जून: दूसरा दिन

इस बीच प्रदेश के लिए जान-माल की क्षति का आँकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है और पिथौरागढ़ और गोविंदघाट से भी बर्बादी की तस्वीर सामने आ रही है.

पिथौरागढ़ में काली नदी की बाढ़ में एनएचपीसी का 200 मेगावाट का प्लांट ध्वस्त हो गया है. गोविंदघाट का बाजार अलकनंदा में समाया गया है और वहाँ नदी उफन रही है.

इस बीच प्रदेश सरकार ने तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है.

16 जून: पहला दिन

दावा है कि अब तक 30 हज़ार यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और 40 हज़ार यात्री अब भी फंसे हुए हैं.

राहत और बचाव का सारा ध्यान फिलहाल यात्रियों को सुरक्षित निकालने में है.

स्थानीय लोग जिनके मकान और दुकान तबाह हो गए, उनकी सुध लेने की तरफ अभी तक ध्यान कम गया है. उनके सामने अंधेरा, आशंका और अनिश्चय है कि जीवन कब पटरी पर लौटे.

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