यमुना ने उजाड़ा आशियाना

सड़क पर लगे टेंटों की कतार
Image caption सड़क तक बढ़ आई यमुना

ये नज़ारा है अक्षरधाम के करीब मयूर विहार से होकर वाली सड़क का. यमुना यहाँ तक बढ़ आई है. यहाँ लगे सैकड़ों शिविरों में वो लोग आसरा लिए हुए हैं जिनके बसेरे यमुना में डूब चुके हैं.

Image caption यही अब घर है

घर-गृहस्थी का बहुत सा सामान बह गया है. लोगों को इतना अंदाजा नहीं था की पानी का स्तर इतना बढ़ जाएगा, इसलिए काफी सामान बाँध कर पीछे छोड़ आये थे. अब उसके मिलने की कोई उम्मीद नहीं है.

Image caption आँखों में दिख रहा है दर्द

तस्वीर में दिख रहे लड़के ने बताया कि यमुना किनारे उसके नर्सरी थी. अच्छे मॉनसून को देखते हुए उसे उम्मीद थी कि लोग ज्यादा पौधे खरीदेंगे. इसी वजह से उसने लाखों के पौधे देश की विभिन्न हिस्सों से मंगा लिए थे. यमुना के पानी में उसका 5 ट्रकों में लदा माल बह गया.

Image caption भूख बुझाने को इतना काफी नहीं

माँ बाप के पास पैसे बचे नहीं. घर रहा नहीं. खाना बनाने के बर्तन भी बहाव में बह गए. सरकारी मदद से मिल रहे खाने की से ही इन बच्चों की भूख मिट रही है.

Image caption पेट शायद पूरा नहीं भरा

सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों को आ रही है. यमुना किनारे रह रहे लोगों के अधिकतर बच्चों की किताबें, उनकी यूनिफार्म सब पानी में बह गया है. गरीब परिवारों के इन बच्चों को शायद लंबे समय तक किताबें पाने और स्कूल जाने का इंतज़ार करना पड़े.

Image caption पानी में डूबी यमुना पुश्ते पर जाने वाली सड़क

यहाँ रहने वाले लोगों ने बताया की इस सड़क से आम दिनों में यमुना के पुश्ते पर पहुँचने के लिए तीस मिनट लगते हैं. लेकिन यमुना ये रास्ता पार करके खुद यहाँ बढ़ आई है. लोग अब भी पानी में डूबे अपने घर से सामान बचाने की कोशिश में जुटे हैं.

Image caption गठरी में बाँधा सामान

इस टेंट में रह रहे परिवार ने बताया की अचानक जब पानी चढ़ आया तो जो भी सामान सामने दिखा वो गठरी में बाँध कर भागना पड़ा. इस परिवार में लोग ज्यादा थे, इसलिए सामान बटोरने वाले हाथ भी ज्यादा रहे. ये औरों से कुछ अधिक सामन बटोर पाए.