दिल्ली विश्वविद्यालय: 95% अंक, फिर भी कतार में

दिल्ली विश्वविद्यालय कैंपस
Image caption दिल्ली विश्वविद्यालय कैंपस

दिल्ली विश्वविद्यालय की पहली कट ऑफ सूची के बाद कैंपस में दिख रहे सैकड़ों नए चेहरों पर ख़ुशी और मायूसी का मिला जुला रंग देखने को मिला.

ऐसे विद्यार्थियों की कतार भी बढ़ गई है जो 95% अंक लाने के बाद भी अपनी पसंद का कॉलेज नहीं पा सके.

'अगर दो नंबर और आ जाते...'

Image caption चंडीगढ़ से दिल्ली आईं नमन

रामजस कॉलेज में दाखिले के लिए चंडीगढ़ से दिल्ली आईं नमन काफी परेशान दिखीं. इन्होंने बारहवीं में 96.5 प्रतिशत अंक हासिल किये हैं. बात करने पर पता चला कि उन्हें अफ़सोस इस बात का है कि अगर उनके दो नंबर और आ जाते तो उन्हें पसंदीदा कॉलेज से बी कॉम आनर्स करने का मौका मिल जाता. नमन दाखिले की लम्बी प्रक्रिया से भी परेशान दिखीं. वो कहती हैं ''यह तकलीफ़देह है... मैं थोड़ी हताश हो गई हूं.''

'क्या फायदा इतना पढ़ने का'

Image caption अदिति गुप्ता

अदिति 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर बहुत खुश हुई थीं लेकिन उन्होंने बताया की अब इस कॉलेज से उस कॉलेज घूम-घूम कर परेशान हो गई हैं. वे पूछती हैं, "अगर इतना पढ़कर भी पसंद के कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पा रहा है तो क्या फायदा इतना पढ़ने का? हम क्यों पढ़ें इतने साल? पूरे साल 12वीं में हमने मेहनत की, रिजल्ट भी अच्छा आया लेकिन क्या फायदा इस रिजल्ट का? ऐसा लग रहा है दाखिले की भीख मांग रहे हैं. बेस्ट कॉलेज से इकोनॉमिक आनर्स करने का मन था लेकिन बेस्ट क्या सेकेंड बेस्ट भी नहीं मिल पा रहा."

दूसरी कट ऑफ़ सूची का इंतज़ार

Image caption बुराड़ी से आये जयराज सिंह

दिल्ली के बुराड़ी से आए जयराज सिंह ने 96 प्रतिशत अंक लाकर अपने परिवार का गौरव बढ़ाया है. इनकी इच्छा थी कि वह हंसराज कॉलेज से बी टेक इलेक्ट्रॉनिक्स करें लेकिन वहां इस कोर्स की ऊँची कट ऑफ के कारण इन्हें हंसराज में एडमिशन नहीं मिल पाया. अब रामजस से मैथ्स आनर्स के लिए कोशिश कर रहे हैं. जयराज को दूसरी कटऑफ सूची का इंतज़ार है. कहते हैं, "थोड़ा दुःख हो रहा है."

'कॉलेज अगर लेडी श्री राम मिल जाता'

Image caption जम्मू -कश्मीर की सुगंध

सुगंध दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए अपने माता-पिता के साथ जम्मू कश्मीर से आई हैं. इन्होंने 95.3 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. बी एससी आनर्स, मैथ्स के लिए दाखिले की कतार में किरोड़ीमल कॉलेज में हमारी इनसे मुलाक़ात हुई. किरोड़ीमल की कट ऑफ को इन्होंने पार किया है. कहती हैं, "कॉलेज अगर लेडी श्री राम मिल जाता या हिन्दू, हंसराज मिल जाता तो ज्यादा अच्छा रहता."

सपनों का कॉलेज मंजिल नहीं

Image caption तोम्या

तोम्या 95.25 प्रतिशत के साथ भी अपने सपनों के कॉलेज को अपनी मंजिल नहीं बना सकीं. उन्हें अपनी पसंद का कोर्स भी नहीं मिल पा रहा है. कहती हैं, "अब किरोड़ीमल कॉलेज में स्टेटिसटिक्स ऑनर्स के साथ ही संतोष करना पड़ रहा है." लेकिन तोम्या ने कहा कि कॉलेज चाहे जो मिले वह खुश हैं मेहनत करके. उन्होंने कहा की भाग्य पर भी भरॊसा कर लेना चाहिए.

मिले 97 प्रतिशत, दाखिला स्पोर्ट्स कोटे में

Image caption कुणाल

हमेशा से श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिले की चाह रखने वाले कुणाल की इच्छा आखिरकार पूरी हो गई है. कोर्स की इन्हें ख़ास परवाह नहीं, पसंद का कॉलेज मिलने की ख़ुशी ही काफी है. इनके बारहवीं में 97 प्रतिशत अंक हैं लेकिन कुणाल को यह दाखिला स्पोर्ट्स कोटे से मिल रहा है. वे कहते हैं "बिना स्पोर्ट्स कोटे के एडमिशन मिलना मुश्किल है, क्योंकि ये एसआरसीसी है."

कॉलेज हॉस्टल नहीं तो बेटी दिल्ली में नहीं

Image caption एस एम शर्मा

चंडीगढ़ से आए एस एम शर्मा जैसी परेशानी ना जाने कितने अभिभावकों की होगी. इनकी बेटी सुमन शर्मा के 97.25 प्रतिशत अंक हैं. एसआरसीसी में बेटी का दाखिला हो चुका है. कुछ समय पहले ही सुमन अपनी माँ को खो चुकी हैं. बेटी को कॉलेज का हॉस्टल नहीं मिलने पर पिता की चिंता उनके चेहरे पर साफ़ नज़र आई. शर्मा जी कहते हैं, "दिल्ली का जैसा माहौल है, उसमें मैं अपनी बेटी को बाहर नहीं रहने दे सकता. मैंने यहाँ हॉस्टल वालों से बात की थी उन्होंने कहा कि रूम बहुत कम हैं. मेरी बेटी को रूम नहीं मिल पाएगा. अगर उसे रूम नहीं मिला तो मैं उसे वापस चंडीगढ़ ले जाऊंगा."