मणिपुर के 'राजा' क्यों हैं भूख हड़ताल पर?

Image caption राजा के सहयोगियों का आरोप है कि सरकार वर्ष 2006 में हुए समझौते का उल्लंघन कर रही है

पूर्वोत्तर भारत के राज्य मणिपुर के नाम मात्र के राजा इन दिनों भूख हड़ताल पर हैं. वजह है- राज्य सरकार ने उन्हें उनके पैतृक महल से बेदख़ल करने का फैसला किया है.

राजा लीशेंबा सानाओबा के सहयोगियों का कहना है कि सरकार ने ये फैसला बिना उनकी सहमति के किया है.

सहयोगियों के मुताबिक सरकार का ये फैसला साल 2006 में शाही परिवार और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है.

वहीं अधिकारियों का कहना है कि शाही महल और उसके आस-पास की जमीन को सरकार विरासत स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है.

राजा सानाओबा ने अपनी भूख हड़ताल सोमवार को शुरू की. दो दिन पहले ही राज्य कैबिनेट ने राजधानी इंफाल में स्थित साना कोनुंग महल का अधिग्रहण करने का फैसला किया था.

राजा के सलाहकार पुयाम तोमचा का कहना है, “राजा के साथ धोखा हुआ है क्योंकि सरकार साल 2006 में हुए समझौते का उल्लंघन कर रही है जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि महल के बारे में कोई भी फैसला बिना राजा की सहमति के नहीं लिया जाएगा.”

धरोहर स्थल

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि वे महल का नवीनीकरण कराकर उसे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाना चाहते हैं.

एक सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, “सरकार राजा सानाओबा के लिए कोई वैकल्पिक आवास मुहैया कराएगी.”

राजधानी स्थित एक अन्य महल कांग्ला महल को पहले ही संग्रहालय में तब्दील किया जा चुका है.

सरकार का तर्क है कि महल के चारों ओर की जमीन अपना पुराना वजूद खो चुकी है क्योंकि पूर्व राजा ओकेंद्र ने इसे बेच दिया था और आज इन जमीनों पर ऊँची इमारतें खड़ी हैं.

मणिपुर के शाही परिवार ने 1891 में एंग्लो-मणिपुर युद्ध के बाद कांग्ला महल पर कब्जा किया था और इसी महल को साना कुनांग के नाम से शाही परिवार के निवास स्थल के रूप में तब्दील किया गया था.

बाद में ये सेना का मुख्यालय बन गया और जब मणिपुर का भारतीय संघ में विलय हुआ तो इस महल में असम राइफल्स के जवान रहने लगे.

भारतीय संघ

Image caption मणिपुर के राजा का आरोप है कि सरकार ने उनके साथ धोखा किया है

हालांकि इसके एक हिस्से में शाही परिवार के लोग अब भी रहते हैं.

पड़ोसी राज्य त्रिपुरा में भी सरकार ने शाही महल उज्ज्यंता के अधिकतर हिस्से का अधिग्रहण करके उसे राज्य की विधान सभा में तब्दील कर दिया, बावजूद इसके एक हिस्से में शाही परिवार के लोग अब भी वहां रहते हैं.

त्रिपुरा और मणिपुर दोनों ही राज्य 15 अक्टूबर 1949 को भारतीय संघ का हिस्सा बने थे लेकिन त्रिपुरा के शाही परिवार के लोग राज्य की राजनीति में काफी प्रभाव रखते हैं और काफी धनी भी हैं, जबकि मणिपुर के शाही परिवार के साथ ऐसा नहीं है.

हाल के कुछ वर्षों में मणिपुर के शाही परिवार के लोगों को खर्च चलाने के लिए अपनी जमीनें बेचनी पड़ी हैं.

राजा सानाओबा के इस विरोधी कदम का उनके मित्रों, कर्मचारियों और परिवार के लोगों ने समर्थन किया है जबकि मणिपुर के कई और लोगों का कहना है कि सरकार का इसे पर्यटन स्थल में परिवर्तित करने का फैसला सही है.

सानाओबा की भूख हड़ताल भले ही बहुत लंबी न चले लेकिन इसने राज्य में एक हलचल तो पैदा कर ही दी है, जहां बहुत से लोग अभी यही मानते हैं कि राजा के पूर्वजों पर भारतीय संघ में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया था.

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