नेचुरल गैस की कीमतें दोगुनी

  • 28 जून 2013
पी चिदंबरम
Image caption चिदंबरम ने कहा है कि प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ने को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है.

कोयला आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्वतंत्र कोयला नियामक बनाए जाने को अपनी मंज़ूरी दे दी है.

साथ ही कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने के फैसले को भी स्वीकृति दे दी है.

प्राकृतिक गैस की कीमत 4.2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से बढ़ाकर 8.4 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू कर दी गई है. बढ़ी हुई कीमतें अप्रैल 2014 से लागू होंगी और इसकी हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ये जानकारी नई दिल्ली में पत्रकार वार्ता में दी. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ने से निवेश आकर्षित होगा और घरेलू उत्पादन में आ रही गिरावट को रोका जा सकेगा.

चिदंबरम ने कहा, “हम कुल खपत का 30 प्रतिशत गैस आयात करते हैं. हमें घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है और निवेश बढ़ाकर ही हम इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं.”

विरोध

वामपंथी दल और सरकार में शामिल कुछ पार्टियां गैस की कीमत बढ़ाए जाने का विरोध कर रही हैं क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने की संभावना है. देश में 2014 में आम चुनाव होने हैं और गैस की बढ़ी हुई कीमतें भी लगभग उसी समय लागू होगी.

हाल ही में आई सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि 25 निजी कंपनियों को 57 कोयला ब्लॉकों का मनमाने ढंग से आवंटन किया गया जिससे सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

इसके बाद यूपीए सरकार ने कुछ कोयला ब्लॉकों के आवंटन को रद्द करने का फैसला किया था.

माना जा रहा है कि स्वतंत्र कोयला नियामक बनाए जाने के बाद बिजली कंपनियों के लिए कोयले की किल्लत दूर हो सकेगी और कीमत मनमाने तरह से नहीं बढ़ेंगी।

सीबीआई

सीबीआई की स्वायत्ता का मुद्दा भी ब्रीफ़िंग में उठा. सरकारी टेलीविज़न के मुताबिक कैबिनेट ने मंत्री समूह के उन अनुशंसाओं को मान लिया है जिसमें सीबीआई को ज़्यादा स्वायत्ता देने की बात थी. इसमें सीबीआई के काम की निगरानी के लिए रिटायर जजों का पैनल बनाने की बात शामिल है.

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में कुछ समय पहले शपथ पत्र दाखिल कर स्वीकार किया है कि कोयला आवंटन घोटाला मामले में स्टेटस रिपोर्ट को साझा किया गया था और उसमें कुछ बदलाव किए गए थे. शपथ पत्र में कहा गया था कि कोयला घोटाले पर स्टेटस रिपोर्ट को न सिर्फ कानून मंत्री के साथ साझा किया गया बल्कि अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी दस्तावेज़ के मसौदे में काफी बदलाव कराए हैं.

उसके बाद से सीबीआई को और स्वायत्त बनाए जाने की माँग तेज़ी पकड़ चुकी है.

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