उत्तराखंड: कभी पता चलेगा सही आँकड़ा?

आपदा प्रबंधन विभाग रोज़ाना आंकड़े जारी करता है
Image caption आपदा प्रबंधन विभाग रोज़ाना आंकड़े जारी करता है

उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा को आधा महीना बीत चुका है लेकिन अचानक आई बाढ़ के दौरान मरने वाले और लापता हुए लोगों की संख्या अब भी स्पष्ट नहीं हुई है.

हाल ही में मीडिया में कुछ ऐसी ख़बरें आईं कि संयुक्त राष्ट्र ने कुछ गैर सरकारी संगठनों की मदद से सर्वेक्षण करके उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा में लापता लोगों की संख्या 11,000 बताई है. संगठन ने इन आंकड़ों को निराधार बताया है लेकिन मृतकों और लापता लोगों की सही संख्या पता लगाना भी दूर की कौड़ी ही साबित हो रहा है.

देहरादून स्थित संवाददाता शालिनी जोशी के अनुसार उत्तराखंड के विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कहा था कि 10,000 तक लोग मारे गए होंगे.

Image caption फँसे लोगों को बचाने में हुआ हेलीकाप्टर हादसा

केदारनाथ की विधायक शैला रानी रावत ने भी कहा कि 10,000 तक लोग मारे गए होंगे.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने पिछले मंगलवार को ही कहा था कि मरने वालों की संख्या एक हज़ार से ज़्यादा हो सकती है. उन्होंने कहा कि आपदा में मारे गए या गायब हुए लोगों का सही आंकड़ा शायद कभी नहीं मिल पाएगा. उनका कहना है कि बाढ़ में बहे या मलबे में दबे लोगों की संख्या का अंदाज़ा लगा पाना कठिन है.

और तो और आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्या ने कहा कि मरने वालों की संख्या पांच हज़ार से अधिक हो सकती है लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग की मानें तो 580 लोग मारे गए हैं. इस संख्या में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए 20 लोग भी शामिल हैं.

यहाँ प्रबंधन विभाग और उसके मंत्री, दोनों के आंकड़ों के बीच कहीं ताल-मेल नहीं दिखता.

मुख्यमंत्री या आपदा प्रबंधन मंत्री ने उत्तराखंड में मारे गए लोगों के बारे में इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है लेकिन इस बारे में जानकारी देने वाले तीनों लोग तो सरकार के ही हैं, फिर उनके बयानों में इतना फ़र्क़ सवाल खड़े करता है.

कितने लोग लापता हैं ?

उत्तराखंड के लापता लोगों के विभाग के प्रभारी अजय प्रद्योत ने बताया कि उन्हें देहरादून के मुख्य राहत शिविर से गुमशुदगी के मामलों की 1000 प्राथमिक रिपोर्ट मिली हैं. इन प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार 3,078 लोग लापता हैं.

Image caption लापता लोगों के परिजन हैं परेशान

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों से तीर्थयात्री वहाँ आए थे, वहां से और उनके ज़िला पुलिस थानों से भी स्थानीय लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट का आंकड़ा इकट्ठा करेंगे. अगले कुछ हफ़्तों में पूरा आंकड़ा मिल सकेगा. यह आंकड़ा बढ़ सकता है.

सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने कहा था की लगभग 3000 लोग लापता हैं.

ऋषिकेश और हरिद्वार से हर साल इन तीर्थ स्थलों के लिए तीर्थयात्रियों की बुकिंग कराने वाले टूर ऑपरेटरों का कहना है कि इस मौसम में लाखों की तादाद में तीर्थयात्री आते हैं.

सवाल ये भी है कि बचे हुए लोगों का पता कब तक लग सकेगा और लग भी सकेगा या नहीं, ये कह पाना अभी बहुत मुश्किल है.

तीर्थयात्रियों की संख्या क्या थी?

Image caption पुल टूटने से संपर्क टूटा

उत्तराखंड की तबाही की ख़बरें इकट्ठा करने गए बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव का कहना है कि अभी तक उत्तराखंड सरकार इस बात का पता लगाने के लिए जूझ रही है कि आख़िर कितने तीर्थयात्री और पर्यटक पंद्रह और सोलह जून के दरमियान केदारनाथ, बद्रीनाथ, गौमुख, गंगोत्री इलाक़ों में मौजूद थे.

सरकार के पास ऐसा भी कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने लोग हर साल यात्रा करने जाते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ यात्रा की चरम सीमा पर केदारनाथ में एक दिन में औसतन 13 से 15 हज़ार लोग होते हैं. हज़ारों लोग रास्ते में होते हैं जो दर्शन के लिए जा रहे होते हैं या लौट रहे होते हैं.

उत्तराखंड के दौरे पर गए केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि राहत एजेंसियों में तालमेल की कमी के कारण बाधाएं आ रही हैं.

उत्तराखंड में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट भी कह चुके है कि सरकार मौत और तबाही के आंकड़े दबा रही है और इसके लिए प्रधानमंत्री के स्तर से मीडिया पर भी दबाव डाला जा रहा है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकतें हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार