खाद्य सुरक्षा पर अध्यादेश को कैबिनेट की मंज़ूरी

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट ने खाद्य सुरक्षा पर अध्यादेश को मंज़ूरी दे दी है.

खाद्य सुरक्षा के तहत देश की क़रीब 67 फ़ीसदी जनता को एकसमान तौर पर पांच किलोग्राम अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों पर एक से तीन रुपए प्रति किलोग्राम की दर से देने का प्रावधान है.

हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि सरकार इसे पारित कराने के लिए संसद का ख़ास सत्र बुलाएगी या फिर अगले सत्र में इसे संसद के पटल पर रखेगी.

राष्ट्रपति की मंज़ूरी के बाद सरकार के पास इस अध्यादेश को कानून में तब्दील करने के लिए छह सप्ताह का वक्त है.

'वादा'

Image caption चुनाव से पहले कांग्रेस और यूपीए सरकार का सबसे बड़ा दांव

वैसे इस अध्यादेश को अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा जाएगा. अगर राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो यह तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगा. हालांकि माना जा रहा है कि इसे लागू होने में अभी भी लंबा वक्त लगेगा.

इससे पहले 13 जून को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई प्रस्तावों पर आम सहमति नहीं होने के चलते विधेयक को मंज़ूरी नहीं मिली थी.

वित्त मंत्री पी चिदबंरम ने कहा कि 2009 के आम चुनाव के घोषणा पत्र में कांग्रेस ने आम लोगों को खाद्य सुरक्षा का अधिकार देने का वादा किया था और सरकार इस वादे को पूरा करेगी.

पी चिदबंरम ने कहा, “यूपीए सरकार और कांग्रेस पार्टी ने खाद्य सुरक्षा अधिकार का वादा किया था. यह विधेयक उन वादों में एक था, जिसके चलते आम लोगों ने हमारी सरकार को फिर से चुना. ऐसे में आम लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए हमें आम लोगों को यह अधिकार देना होगा. यूपीए सरकार इसे काननू का रूप देगी.”

भोजन के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट कमिश्नरों के प्रमुख सलाहकार बिराज पटनायक ने कहा है, 'मेरा मानना है कि इस विधेयक से कुपोषण के आंकड़ों में गिरावट नहीं आने वाली क्योंकि हम अहम मानकों की बात नहीं कर रहे हैं, जिनसे कुपोषण का संबंध है. इससे भुखमरी की समस्या भी तुरंत हल नहीं होती. मगर भोजन के अधिकार के मामले को अगर समग्र तौर पर देखें तो यह सही दिशा में उठाया गया छोटा सा कदम है.'

पहले ये माना जा रहा था कि खाद्य सुरक्षा विधेयक को संसद के बजट सत्र में पेश किया जाएगा, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इसे संसद में पेश नहीं किया गया.

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