मिस्र: सेना ने दी सख़्त चेतावनी

सेना का कहना है, देश के भविष्य का सवाल है
Image caption सेना का कहना है, देश के भविष्य का सवाल है

मिस्र के रक्षा मंत्री ने सख़्त चेतावनी देते हुए कहा है कि देश के बदलाव के मुश्किल दौर में किसी को भी कोई व्यवधान डालने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सेना द्वारा अपदस्थ किए जाने और संवैधानिक अदालत के प्रधान न्यायाधीश अदली मंसूर को अंतरिम नेता चुने जाने के लगभग एक सप्ताह बाद मिस्र के रक्षा मंत्री का ये बयान आया है.

मोहम्मद मुर्सी के समर्थक उन्हें अपदस्थ किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.

इस बीच अदली मंसूर ने पूर्व वित्त मंत्री हाज़िम अल-बेब्लावी को प्रधानमंत्री नियुक्त कर अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश की है.

बेब्लावी ने बीबीसी की अरबी सेवा को बताया कि वह अनुभव और क्षमता के आधार पर अपने मंत्रियों का चुनाव करेंगे.

लेकिन उन्होंने कहा कि 'यह बताना उनके लिए कठिन होगा कि कब तक' वह सरकार के गठन का काम पूरा कर लेंगे.

बारादेई बने उपराष्ट्रपति

अंतरिम नेता ने उदारवादी नेता मोहम्मद अल-बारादेई को विदेश मामलों की ज़िम्मेदारी के साथ उपराष्ट्रपति नियुक्त किया है. उन्होंने एक अस्थाई संविधान जारी किया है और अगले साल की शुरुआत में सत्ता के हस्तांतरण के लिए एक समय सारिणी जारी की है.

कट्टरपंथी नूर पार्टी ने कहा है कि वह अब भी सयुंक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख रह चुके अल-बारादेई के नामांकन पर विचार कर रही है.

इस हफ्ते की शुरुआत में नूर पार्टी ने प्रधानमंत्री पद के लिए अल-बारादेई की उम्मीदवारी पर आपत्ति जताई थी.

नूर पार्टी ने नई सरकार बनाने की वार्ता से खुद को अलग कर लिया, लेकिन मंगलवार को आई ख़बरों से पता चलता है क़ि वह दोबारा इस प्रक्रिया में शामिल हो गई है.

टेलीविज़न पर दिए भाषण में रक्षा मंत्री अब्देल फ़तह अल-सीसी ने कहा कि " देश का भविष्य बहुत महत्वपूर्ण है. " सेना और मिस्र की जनता दोनों ही इस "कठिन और जटिल समय" में कोई " रूकावट या बाधा" बर्दाश्त नहीं करेंगे.

Image caption सोमवार को मोहम्मद मुर्सी के 51 समर्थक मारे गए थे

सोमवार को मोहम्मद मुर्सी के 51 समर्थक सेना के बैरक के बाहर मारे गए थे. मुस्लिम ब्रदरहुड का मानना है कि मोहम्मद मुर्सी को बैरक में रखा गया है.

मारे गए लोगों के परिजनों ने बताया कि उनसे कहा गया है कि आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट स्वीकार करने पर ही उनके परिजनों के शव लौटाए जाएंगे.

वित्तिय मदद

इस बीच मोहम्मद मुर्सी को हटाए जाने का कुछ खाड़ी देशों ने स्वागत किया है. संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने नई सरकार को अपना समर्थन जताने के लिए बड़ी वित्तीय मदद की घोषणा की है.

संयुक्त अरब अमीरात ने दो अरब डॉलर के ऋण और एक अरब डॉलर की सहायता राशी देने का वायदा किया है, वहीं सऊदी अरब ने पाँच अरब डॉलर से ज़्यादा की मदद को मंजूरी दी है.

बीबीसी के अरब मामलों के संपादक सेबेश्टियन अशर के मुताबिक़ दोनों देश मुस्लिम ब्रदरहुड पर भरोसा नहीं करते.

Image caption ऊदी अरब ने पाँच अरब से ज़्यादा की मदद को मंजूरी दी है

लेकिन अन्य देशों ने सेना के इस क़दम का विरोध किया है. सबसे अधिक खुल कर तुर्की सामने आया है.

मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ किए जाने के बाद तुर्की के विदेश मंत्री अहमद दावुतोगुलू ने कहा, "लोकतान्त्रिक चुनावों से बनी सरकार के लिए यह अस्वीकार्य है कि उसे अनुचित तरीकों, वह भी सेना के तख्तापलट से हटाया जाए."

तुर्की के प्रधानमंत्री रेसेप तैयप एरडोगन भी मुर्सी की तरह धार्मिक पार्टी से जुड़े हैं. पिछले कुछ हफ़्तों में उनके ख़िलाफ़ भी सड़कों पर प्रदर्शन हुए हैं, जिनमे से कई हिंसक भी रहे.

पिछले सप्ताह मिस्र में हुए नाटकीय घटनाक्रम पर शुरुआत में अमरीका ने चिता ज़ाहिर की थी. मंगलवार को अमरीका ने कहा कि वह नई सरकार के चुनाव की समय सारिणी जारी होने से उत्साहित है.

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