बच्चों की मौत में साज़िश की आशंका: मंत्री

  • 17 जुलाई 2013
बिहार
Image caption कई बीमार बच्चों को पटना के अस्पताल में भर्ती कराया गया है

बिहार सरकार ने राज्य के छपरा ज़िले के मशरख ब्लॉक में स्कूल में विषाक्त भोजन खाने से 22 बच्चों की मौत के मामले में षडयंत्र होने का आरोप लगाया है.

बिहार के शिक्षा मंत्री पीके शाही ने बुधवार को एक प्रेस काफ्रेंस में कहा कि डॉक्टरों के मुताबिक़ बच्चों के शरीर से ऑर्गेनिक फॉस्फोरस की गंध आ रही थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की अभियुक्त शिक्षिका के पति और चचेरे भाई एक राजनीतिक दल से संबंधित हैं.

इस मामले में स्कूल की एक शिक्षिका और अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है. यह शिक्षिका हाल ही में इस स्कूल में स्थानांतरित हुई थी.

शाही ने कहा कि यह सिर्फ़ संयोग नहीं हो सकता कि शिक्षिका दूसरे स्थान से इस स्कूल में आई और उसके पति और चचेरे भाई राजानीतिक कार्यकर्ता हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि जांच में बाधा डालने के लिए मशरख में बुधवार को ऐसा माहौल बनाया गया है ताकि पुलिस वहां काम न कर सके.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूल में राशन आपूर्ति करने वाला भी नेता का चालक और अंगरक्षक है.

इसके अलावा अभियुक्त शिक्षिका के पति की दुकान से ही राशन का सामान आता था. उन्होंने कहा कि खाना बनाने वाली महिला को कढ़ाही में तेल डालते ही उस पर संदेह हो गया था लेकिन शिक्षिका ने ज़ोर देकर उसे इसी का इस्तेमाल करने को कहा.

बताया जाता है कि बच्चों की शिकायत के बाद खाना बनाने वाली महिला ने भी सब्ज़ी खाई और उसकी भी तबियत ख़राब हो गई.

अन्य घटना

इस बीच मधुबनी ज़िले में बिस्फ़ी अंचल के नवटोल मध्यविद्यालय में मध्याह्न भोजन के दौरान दो बच्चियों की तबीयत बिगड़ गई.

उनके पेट में दर्द हुआ और उल्टी हुई. उन्हें अस्पताल ले जाया गया और अब वे दोनों ख़तरे से बाहर है.

दूसरी ओर गया ज़िले के अतरी अंचल के सुमरनबिगहा गाँव में बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाई जा रही थी.

वहाँ 22 बच्चे थे, जिनमें से आठ साल का एक बच्चा बेहोश गया और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई.

शर्मनाक

उधर छपरा में विषाक्त भोजन से बीमार 30 बच्चों को पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जाती है.

ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चों को स्कूल के पास ही दफ़ना दिया गया है और ग़ुस्साए लोगों ने कई जगह तो़ड़फोड़ की है.

इस घटना के विरोध में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने बुधवार को छपरा में बंद बुलाया.

बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार इस घटना पर आम लोगों में भी बहुत ग़ुस्सा है और इसलिए यह बंद स्वतःस्फूर्त है.

पीएमसीएच के उप अधीक्षक डॉ. कारक ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार रात चार बच्चे मृतावस्था में अस्पताल लाए गए थे. इलाज के दौरान तीन बच्चों की मौत हो गई. 15 बच्चों की मौत छपरा और मशरख के अस्पतालों में हो गई थी.

डॉ. कारक ने यह भी कहा कि पांच बच्चे अब भी गंभीर हैं लेकिन अन्य को बचा लिए जाने की उम्मीद है.

पीएमसीएच के अधीक्षक अमरकांत झा आज़ाद का कहना है कि पीड़ित बच्चों को बाल चिकित्सा विभाग के आईसीयू में भर्ती किया गया है और चौबीसों घंटे डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं.

कई बच्चे छपरा के अस्पताल में भी भर्ती हैं. स्कूल में कल 100 बच्चे आए थे. गांव वालों के अनुसार मशरख में कई बच्चों को स्कूल के नज़दीक ही दफ़नाया गया है.

लापरवाही का आरोप

Image caption छपरा में लोगों में मातम और गुस्सा है

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मशरख़ में डॉक्टरों ने विषाक्त भोजन से पीड़ित बच्चों का इलाज करने में देरी की. उनका कहना है कि अगर समय पर इलाज किया जाता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं.

इसके बाद ग़ुस्साए लोगों ने कई जगह तोड़फोड़ और आगजनी भी की.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद डॉ सीपी ठाकुर ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि बच्चों की मौत तेज़ ज़हर से हुई है. उन्होंने कहा कि यह ज़हर खाने में मिला हुआ था लेकिन यह किस तरह मिला, यह जांच का विषय है.

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पीएसीएच में बीमार बच्चों को देखने के बाद मांग की कि जिन बच्चों की हालत नाज़ुक है उनका इलाज दिल्ली ले जाकर करवाया जाए. उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न तो छपरा गए और न ही बीमार बच्चों को देखने पीएमसीएच आए.

मिड डे मील में गड़बड़ी का मामला इससे पहले 2010 में आया था. बिहार के सीतामढ़ी में 11 मार्च को विषाक्त भोजन से दो बच्चों की मौत हो गई थी और कई बीमार पड़ गए थे.

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