तेज़ाब की शिकार महिला को 15 दिन में मुआवज़ा

  • 18 जुलाई 2013
एसिड हमले पर सुप्रीम कोर्ट
Image caption सुप्रीम कोर्ट के नए दिशा निर्देश.

एसिड हमलों की शिकार महिलाओं को राहत देने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने नई गाइड लाइन जारी की है.

भारत के सर्वोच्च अदालत ने गुरूवार को गाइड लाइन जारी करते हुए सभी राज्यों को तीन महीने के अंदर तेज़ाब एवं अन्य हानिकारक पदार्थों की खुदरा बिक्री का नियमन करने के लिए कहा है.

अदालत ने तेज़ाब की शिकार महिलाओं को तीन लाख रूपए मुआवज़ा देने के आदेश दिए हैं. इसमें से एक लाख का मुआवज़ा राज्य सरकार को घटना के पन्द्रह दिन के अंदर देना होगा.

ग़ौरतलब है कि तेज़ाब से महिलाओं पर बढ़ते हमलों पर लगाम लगाने की कोशिश में मंगलवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को एक हलफ़नामा देकर कहा था कि उसने तेज़ाब की ख़रीद फ़रोख़्त को नियंत्रित करने के लिए ‘प्वॉयज़न पजेशन एंड सेल्स रूल 2013’ का मसौदा तैयार किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र, राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों से तेज़ाब से हमले को ग़ैर-ज़मानती अपराध बनाने के लिए कहा है.

अदालत के आदेशानुसार 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को तेज़ाब नहीं बेचा जा सकेगा.

इसके अलावा अदालत के फ़ैसले के बाद अब तेज़ाब ख़रीदने के लिए फ़ोटो पहचान पत्र ज़रूरी होगा. साथ ही साथ विक्रेता को ख़रीदार का पता भी रखना होगा.

ग़ैर-क़ानूनी ढंग से तेज़ाब बेचने वाले पर 50,000 जुर्माना लगाया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तेज़ाब की बिक्री से जुड़े दिशानिर्देशों के बारे में लोगों को जागरुक करने की ज़रूरत है.

लक्ष्मी की याचिका

तेज़ाब के हमले में घायल लक्ष्मी ने 2006 में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. हमले के वक़्त लक्ष्मी नाबालिग़ थी.

इस याचिका में लक्ष्मी ने नया क़ानून बनाने या फिर भारतीय दंड संहिता, साक्ष्य कानून और अपराध प्रक्रिया संहिता में ही उचित संशोधन करके ऐसे हमलों से निपटने का प्रावधान करने और पीड़ितों के लिए मुआवज़े की व्यवस्था करने का अनुरोध किया था.

लक्ष्मी के संग यह हादसा 22 अप्रैल, 2005 में हुआ था. एक लड़के ने लक्ष्मी द्वारा विवाह प्रस्ताब ठुकराए जाने के बाद अपने दोस्तों के साथ मिलकर लक्ष्मी पर तेज़ाब फेंक दिया था.

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