2 जी स्पेक्ट्रम :अनिल और टीना अंबानी पेश होंगे गवाह के रूप में

अनिल अम्बानी
Image caption अदालत ने 2-जी मामले में अनिल और टीना अंबानी समेत 13 लोगों को गवाह के रूप में बुलाने की इजाजत दे दी है.

शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत ने रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी और उनकी पत्नी टीना अंबानी समेत अन्य 11 लोगों को 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाह के रूप में बुलाने की इजाज़त दे दी है.

सीबीआई के विशेष जज ओपी सैनी ने फैसले में कहा, “मुझे लगता है कि इस मामले में न्यायपूर्ण फैसले के लिए इन लोगों का गवाह के रूप में पेश होना जरूरी है...यह अदालत आवेदनकर्ता को इन लोगों सहित सभी 13 लोगों को समन भेजने की अनुमति देती है.”

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई ने अपनी याचिका में मांग की थी कि वह रिलायंस एडीए ग्रुप के स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड में 990 करोड़ रुपए के कथित निवेश के संबंध में अनिल अंबानी को समन भेजना चाहती है. 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में स्वॉन टेलीकॉम और इसके प्रमोटर्स शाहिद उस्मान और विनोद गोयनका के ऊपर मुकदमा चल रहा है.

सीबीआई ने अदालत से कहा था कि रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन होने के नाते अनिल अंबानी अपने समूह की कंपनी के कथित निवेश के बारे में रोशनी डाल सकते हैं.

विशेष सरकारी वकील यूयू ललित ने कहा, “कई कथित कंपनियों के इस मामले में शामिल होने के बारे में अनिल अंबानी से पूछताछ जरूरी है.”

टीना की भूमिका

सीबीआई ने अपने आवेदन में कहा था कि अनिल अंबानी और उनकी पत्नी के पास कंपनी की तरफ से चेक जारी करने की “अनियंत्रित शक्ति” है और टीना अंबानी ने इस मामले से जुड़ी बैठकों में हिस्सा भी लिया था.

Image caption अदालत ने टीना अंबानी को भी गवाह के रूप में बुलाने की इजाजत दे दी है.

रिलायंस एडीएजी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से हाजिर हुए वकीलों ने सीबीआई के इस आवेदन का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि सीबीआई ने यह आवेदन करने में जो देर की उससे यह पता चलता है कि यह जरूरी नहीं है.

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सीबीआई इस आवेदन में हुई देरी के कारण बता सकती है लेकिन सीबीआई ने इस बारे में कोई ब्यौरा नहीं दिया है.

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सीबीआई इस मामले में अब एक नया केस शुरू करने की कोशिश कर रही है.

अदालत ने 17 जुलाई को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था.

रिलायंस एडीएजी समूह कि कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) इस मामले में अभियुक्त है. रिलायंस एडीएजी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों गौतम दोषी, सुरेन्द्र पिपरा और हरि नायर पर इस मामले में मुकदमा चल रहा है.

सीबीआई ने पहले अनिल अंबानी और टीना अंबानी समेत कुल 17 लोगों को गवाह के रूप में बुलाने के लिए समन जारी करने की अनुमति मांगी थी लेकिन बहस के दौरान अदालत से कहा गया कि सीबीआई इनमें से चार नामों को निकाल रही है.

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि महंगी रेडियो तरंगो के आवंटन से जुड़े 2-जी लाइसेंस के मामले में रिलायंस एक अवैध कंपनी स्वान टेलीकॉम का मुखौटे के रूप में प्रयोग किया था.

अनिल का बयान जरूरी

Image caption सीबीआई ने अदालत से कहा कि इस मामले में अनिल अंबानी की गवाही ज़रूरी है.

सीबीआई ने अपने आवेदन में कहा था कि स्वान टेलीकॉम के लिए यूएएस लाइसेंस लेने के निर्णय के बारे में जानने के लिए अनिल अंबानी का बयान ज़रूरी है.

सीबीआई के अनुसार “स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड, टाइगर ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड, जेब्रा कंसल्टैंट्स प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों को इस मामले में शामिल करने के लिए कौन ज़िम्मेदार है यह जानने के लिए रिलायंस एडीए ग्रुप के प्रमुख होने के नाते अनिल की गवाही आवश्यक है.”

टीना अंबानी के बारे में सीबीआई ने कहा कि टीना रिलायंस एडीए ग्रुप में “महत्वपूर्ण पद” पर थीं और वो “टाइगर ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड और स्वान टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के लिए लेन-देन करने की खातिर अनियंत्रित अधिकारों के साथ अधिकृत थीं.”

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