वेदांता को झटका, ग्राम सभा ने ठुकराई खनन की अर्ज़ी

नियमगिरि

रायगडा ज़िले के सेरकापाड़ी में हुई ग्राम सभा की बैठक ने नियामगिरि पर्वत में बॉक्साइट के खनन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया है. यहां ब्रितानी वेदांता एल्युमीनियम कंपनी प्लांट लगाना चाहती है.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल के अपने एक फ़ैसले में आदिवासियों के 'पवित्र पर्वत' पर खुदाई की इजाज़त दिए जाने या नकारने का निर्णय ग्राम सभाओं पर छोड़ दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने नियामगिरि के इर्दगिर्द बसे रायगडा और कालाहांडी ज़िलों के 12 गावों में ग्राम सभा गठन की घोषणा की.

गुरुवार को 12 ग्राम सभाओं की श्रृंखला में हुई पहली ग्राम सभा में उपस्थित सभी 38 सदस्यों ने नियामगिरि में खनन का कड़ा विरोध किया.

ग्राम सभा के सदस्यों ने कहा कि नियामगिरि पहाड़ को वे अपना देवता मानते हैं और उस पर खुदाई की इज़ाज़त कतई नहीं देंगे.

खुला विरोध

स्थानीय पत्रकार मनोज पात्र ने बीबीसी को बताया कि बैठक स्थल पर पुलिस की तगड़ी उपस्थति के बावजूद सदस्यों ने खुलकर अपना विरोध जताया और स्पष्ट किया की वे मरते दम तक नियामगिरि में खनन का विरोध करते रहेंगे.

बैठक की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रायगडा ज़िला जज शरत चन्द्र मिश्र वहां बतौर पर्यवेक्षक उपस्थित थे.

कुछ आदिवासियों ने 'कुई' भाषा में अपनी बात कही, जिसका एक इंटरप्रेटर के ज़रिए तरजुमा किया गया और फिर उसे कागज़ पर लिखकर उस पर सदस्यों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए.

हालाँकि राज्य सरकार और वेदांता दोनों ही सेरकापाड़ी ग्राम सभा की बैठक के बारे में प्रतिक्रिया देने से कतरा रहे हैं. लेकिन माना जा रहा है कि फ़ैसले से दोनों को गहरी निराशा हुई होगी.

Image caption डोंगरिया कंध आदिवासी नियमगिरी को देवता मानते हैं और इसलिए पर्वत की खुदाई नहीं चाहते.

दूसरी तरफ़ नियामगिरि में खनन का विरोध कर रहे संगठन ग्राम सभा के फ़ैसले से काफ़ी उत्साहित है.

'इरादा तर्क करे'

डोंगरिया कंध आदिवासियों का संगठन नियामगिरि सुरक्षा समिति के सलाहकार भालचंद्र सडन्गी ने बीबीसी से टेलीफोन पर बातचीत में कहा, "बाक़ि 11 ग्राम सभा में भी यही होगा इसलिए सरकार को दीवार पर लेख को पढ़ लेना चाहिए और नियामगिरि में बॉक्साइट खनन का इरादा छोड़ देना चाहिए."

नियामगिरि सुरक्षा समिति ने पहले ही आरोप लगाया है कि पर्वत के आसपास 100 से भी अधिक गाँव होने के बावजूद ओडिशा सरकार ने केवल 12 गाँव में ग्राम सभा कराने का निर्णय लेकर वेदांत के लिए रास्ता आसान करने की कोशिश कर रही है.

समिति ने घोषणा की है कि वह 112 गावों में ग्राम सभा आयोजित करेगी तथा बैठक की विडियो रिकॉर्डिंग और उनमें पारित प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के पास भेजेगी.

ग़ौरतलब है कि नियामगिरि में खनन पर पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लगाए गए प्रतिबन्ध के कारण पर्वत के निकट कालाहांडी ज़िले के लांजिगढ़ में वेदांत द्वारा लगाई गई एक मिलियन टन की रिफ़ाइनरी पिछले दिसम्बर पांच से बंद पड़ी है.

प्लांट पर ख़तरा

अगर वेदांता को नियामगिरि में खुदाई की अनुमति नहीं मिलती तो न केवल यह रिफ़ाइनरी बल्कि झारसुगुडा में कंपनी के स्मेल्टर प्लांट की भी बंद होने की नौबत आ जाएगी और कंपनी द्वारा 40, 000 करोड़ की लागत पर बनी यह पूरी परियोजना ख़तरे में पड़ जाएगी.

सन 2003 में वेदांता और राज्य सरकार के उपक्रम ओडिशा माइनिंग कंपनी या ओएमसी के बीच हुए समझौते के अनुसार वेदांता अगले 30 सालों में क़रीब 150 मिलियन टन बॉक्साइट का खनन करने वाली थी.

लेकिन स्थानीय डोंगरिया कोंध आदिवासियों के विरोध और अदालत में चल रहे मामलों के कारण कंपनी अभी तक यहाँ से एक ग्राम बॉक्साइट भी नहीं निकाल पाई है.

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