सीमा पर डकैती, चार भारतीय फ़ौजी गिरफ़्तार

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चीन के साथ लगी पूर्वोत्तर सीमा पर चार भारतीय सैनिकों को डकैती और लूट के आरोप में पकड़ा गया है. भारतीय सेना ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.

पुलिस के मुताबिक़ चारों सैनिकों को पिछले हफ़्ते असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर एक चौकी पर पकड़ा गया था.

असम के दीमापुर में रंगापहाड़ा में मौजूद तीसरे आर्मी कोर की तरफ़ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है. विज्ञप्ति के मुताबिक़, "यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और दुर्लभ अपवाद है...इस मामले में जांच का आदेश दिया गया है ताकि तथ्य सामने आ सकें और मिलिट्री प्रोटोकॉल और नियमों का उल्लंघन होने से बचाया जा सके."

सेना के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल एनएन जोशी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया, "अगर ये सैनिक दोषी मिलते हैं, तो सैन्य अनुशासन के मुताबिक़ इनके साथ कड़ाई का व्यवहार किया जाएगा. एक बार फिर हम कहना चाहते हैं कि सेना में ऐसी वारदात किसी भी हालत में अक्षम्य हैं और ऐसे मामलों में कड़ा रवैया अपनाया जाता है."

जाली करेंसी छापने का सामान मिला

Image caption लूट में शामिल होने के पहले भी मामले हो चुके हैं, जिन पर भारतीय सेना ने कड़ी कार्रवाई की है.

अरुणाचल प्रदेश पुलिस के मुताबिक़ चारों सैनिकों समेत नौ लोगों को पिछले हफ़्ते गुरुवार को बांदरदेवा चेकगेट से गिरफ़्तार किया गया था. यह जगह राज्य की राजधानी ईटानगर के पास है.

इन सैनिकों से तीन राइफ़लें और क़रीब 200 राउंड कारतूस बरामद किए गए हैं. सैनिकों से 10 मोबाइल फ़ोन और नोट पेपर भी मिला है, जिसका इस्तेमाल जाली करेंसी छापने के लिए किया जाता था.

ईटानगर पुलिस अधीक्षक नबाम गुंगटे ने कहा है कि सैनिक और उनके दूसरे साथियों पर लोअर राजधानी की नीपको कॉलोनी में एक शख्स ताना करन से छह लाख रुपए छीनने की कोशिश का आरोप है.

गुंगटे ने बताया, "करन के मुताबिक़ इस गैंग ने उन्हें छह लाख रुपए के बदले 30 लाख रुपए देने का वादा किया था लेकिन जब वह उसे लेने गया तो उससे बंदूक़ दिखाकर सैनिकों ने पैसा लूट लिया."

पुलिस के मुताबिक़ जिस कार में सैनिकों और उनके साथियों ने भागने की कोशिश की, वह भी ज़ब्त कर ली गई है.

सैनिकों के पाँच साथी भी गिरफ़्तार

चारों गिरफ़्तार सैनिकों की पहचान नायक सूबेदार आरके यादव, राइफ़लमैन प्रदीप कुमार, अरुण सरकार और पी चंदू के बतौर हुई है. चारों असम के उत्तरी लखीमपुर ज़िले के लिकाबाली इलाक़े में मौजूद 138 मीडियम रेजीमेंट में तैनात थे.

इन सैनिकों के पांच साथियों की शिनाख़्त अतीका इस्लाम, गणेश छेत्री, जाहरुल हक़, सुल्तान मोहम्मद और रियाज़ुल इस्लाम के बतौर की गई है. पांचों असम के रहने वाले हैं.

Image caption भारत अपनी सीमा पर जाली करेंसी के कारोबार को लेकर चिंता जताता रहा है

इनके ख़िलाफ़ आर्म्स ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है लेकिन पुलिस का कहना है कि वह जाली करेंसी के मामले में भी इनसे पूछताछ कर रही है.

चीन ने हाल ही में भारत से वादा किया है कि वह अपनी सीमा में जाली भारतीय करेंसी का कारोबार करने वालों पर शिकंजा कसेगा. भारत काफ़ी वक़्त से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान में मौजूद कई गैंग तीसरे देशों मसलन बांग्लादेश (और अब चीन) के सहारे करोड़ों रुपए की जाली करेंसी उसकी सीमा में भेज रहे हैं.

पहले भी लूट में शामिल थे सैनिक

लूट की वारदात में तीसरी भारतीय आर्मी कोर के शामिल होने की यह दूसरी घटना है. इससे पहले 21 अक्तूबर 2011 को मिलिट्री इंटेलीजेंस की टीम पर सेना के ठेकेदार पूना गोगोई के घर से लूट के आरोप लगे थे. यह घटना असम के उत्तरी शहर जोरहाट में हुई थी.

सेना ने बाद में माना था कि ऑपरेशन ‘नियमों के मुताबिक़ नहीं हुआ था’ और दोषी कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी.

इस साल फ़रवरी में मणिपुर में तैनात एक सेनाधिकारी को अवैध ड्रग्स से भरी एक जीप के साथ पकड़ा गया था. यह घटना भारत-बर्मा सीमा पर मोरेह इलाक़े में हुई थी.

लेफ़्टिनेंट कर्नल अजय चौधरी को बाद में ज़मानत मिल गई थी लेकिन सेना का कहना था कि वह उन्हें सैन्य प्रवक्ता के उनके पद पर नहीं रख सकती. भारतीय रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने इस मामले की पूरी रिपोर्ट सेना से मांगी थी.

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