बिहार में मिड डे मील से 'दूर रहेंगे' शिक्षक?

मिड डे मील

बिहार में शिक्षकों ने धमकी दी है कि वो मिड डे मील योजना के लिए काम नहीं करेंगे.

बिहार के छपरा में पिछले हफ्ते ज़हरीला ख़ाना खाने से 23 बच्चों की मौत हो गई थी. शिक्षकों का कहना है कि उन्हें “पढ़ाई के अलावा दूसरे कामों में नहीं लगाया जाना चाहिए.”

मिड डे मील योजना में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त ख़ाना दिया जाता है लेकिन अक्सर इसमें साफ-सफाई पर ध्यान न दिए जाने की शिकायत की जाती है.

बिहार के प्राथमिक शिक्षकों के संगठन के प्रमुख बी शर्मा का कहना है कि करीब तीन लाख प्राथमिक स्कूल शिक्षकों ने शुक्रवार से “मिड डे मील योजना के क्रियान्वयन” से अलग होने का फैसला किया है.

बी शर्मा ने कहा कि “शिक्षकों और हेडमास्टर को खराब गुणवत्ता के खाने, भ्रष्टाचार और बहुत थोड़ी मदद के बावजूद इस योजना का इंतजाम करना पड़ता है लेकिन जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो शिक्षक या प्रिंसिपल को ही ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.”

सरकार के पास 'पैसा नहीं'

Image caption छपरा में पिछले हफ्ते 23 बच्चों की मौत हुई थी

हालांकि बिहार के शिक्षा मंत्री पीके शाही ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक मिड डे मील योजना में शिक्षकों की भागीदारी ज़रूरी है.

पीके शाही ने कहा कि “सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वो योजना को अमल में लाने के लिए लोगों की भर्ती करें.”

बिहार के सारण ज़िले में पिछले हफ्ते 5 से 12 साल उम्र के 47 बच्चे चावल और सोयाबीन से बना मुफ्त खाना खाने से बीमार पड़ गए थे. इनमें से 23 की मौत हो गई थी.

खाने के नमूनों की जांच में पता चला कि उन्होंने जो खाना खाया था उसमें बड़ी मात्रा में कीटनाशक था. अधिकारियों का कहना है कि स्कूल की प्रिंसिपल मीना कुमारी पर आपराधिक लापरवाही बरतने का शक है.

इसी घटना के बाद बिहार के नवादा ज़िले में सरकारी स्कूल के छात्रों ने घटिया गुणवत्ता का भोजन मिलने के विरोध में अपने शिक्षकों की पिटाई कर दी थी.

मिड डे मील योजना की शुरुआत भूख से लड़ने और बच्चों की स्कूल में उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए की गई थी. अभी 12 लाख स्कूलों में करीब 12 करोड़ बच्चे इस योजना का फायदा उठाते हैं.

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