मोदी पर पत्र: सीताराम येचुरी ने दस्तख़त किए या नहीं?

सीताराम येचुरी
Image caption ओबामा को लिखे पत्र पर येचुरी के भी दस्तख़त हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्य सभा सांसद सीताराम येचुरी के पास इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अमरीकी वीज़ा न दिए जाने के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा को लिखी गई चिट्ठी में दस्तख़त किए या नहीं.

बीबीसी हिंदी की ओर से इस बारे में सवाल पूछे जाने पर सीताराम येचुरी ने साफ़ साफ़ ये नहीं कहा कि इस चिट्ठी में उनके दस्तख़त फ़र्ज़ी हैं. पर पलट कर सवाल करते हुए कहा,"कहीं और किए गए दस्तख़त कहीं और लगाए जा सकते हैं."

जब उनसे फिर पूछा गया कि क्या बराक ओबामा को लिखी गई चिट्ठी में उनके दस्तख़त कहीं और से उठाकर लगा दिए गए हैं तो येचुरी ने कहा,"अब आप लगाइए अपना दिमाग़. अपना भी तो दिमाग़ है ना?"

लेकिन जब उनसे स्पष्ट सवाल किया गया कि आपके अनुसार क्या आपके दस्तख़त फ़र्ज़ी हैं, येचुरी ने कहा, "ये थोड़े ही कहा मैंने."

अमरीका में मोदी के लिए वीज़ा 'मांगना शर्मनाक'

पैंसठ भारतीय सांसदों की ओर से 26 नवंबर 2012 को लिखी गई इस चिट्ठी पर सोमवार से ही विवाद चल रहा है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपनी अमरीका यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी को अमरीकी वीज़ा दिए जाने की माँग की है.

दुर्भाग्यपूर्ण

Image caption ओबामा को लिखे पत्र पर 40 राज्यसभा और 25 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं.

इस पत्र के लिए सांसदों को एकजुट करने वाले निर्दलीय राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने सीताराम येचुरी द्वारा दस्तख़त और पत्र पर सवाल उठाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उन्होंने यह भी कहा कि वे सीताराम येचुरी से मिलकर उन्हें पत्र के बारे में याद दिलाएंगे.

सांसद अदीब ने कहा,"मुझे अफसोस है कि इतने अच्छे नेता और मेरे मित्र सीताराम येचुरी जी इस पत्र पर और इसकी सामग्री पर शक करते हैं. मैं उनसे आज मिलूंगा और इस पत्र के बारे में याद दिलाऊंगा. पहले मेरा ख्याल यह था कि वे इसके बारे में भूल गए हैं या उन्हें लग रहा है कि कोई नया पत्र लिखा गया है. ये पत्र अब से सात महीने पहले लिखा गया था और उन्होंने खुद इस पर दस्तख़त किए थे."

नरेंद्र मोदी को अमरीकी वीज़ा की क्या ज़रूरत?

उन्होंने कहा,"ऐसा भी हो सकता है कि येचुरी जी ने एक बात कह दी हो और वे अब उस पर टिके रहना चाहते हों. मैं बस यही कहूंगा कि वे फिर से याद करने की कोशिश करें."

मक़सद

पत्र लिखने के संबंध में उन्होंने कहा, "हमारा कोई मकसद यह नहीं है कि मोदी को वीज़ा न मिले और वे वहाँ चंदा जमा करने न जा पाए. हमारा मकसद सिर्फ यह है कि जब उन्हें पश्चिम ने स्वीकार नहीं किया तो उनकी पार्टी के अध्यक्ष अमरीका में सिर्फ इसलिए वीज़ा माँग रहै हैं ताकि यहाँ आकर बता सके कि उनका प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार पश्चिम में भी स्वीकार्य भी है. अभी हालात यह हैं कि उनका नेता पश्चिम में और दुनिया के बाकी हिस्सों में स्वीकार्य नहीं है. सवाल यही है कि क्या दस साल पहले जिन कारणों से वीज़ा नहीं दिया गया था क्या अभी वे कारण बदल गए हैं और यदि नहीं बदले हैं तो फिर वीजा क्यों दिया जा रहा है. "

Image caption 2002 गुजरात दंगों के बाद अमरीका ने मोदी को वीज़ा नहीं दिया है.

मोदी क्यों करते हैं धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख?

अदीब का कहना है,"हम समझते हैं कि मोदी ने हमारी कौम के साथ जुल्म किया है. इसलिए जितने भी सेक्यूलर सांसद हैं उन्होंने इस पर दस्तख़त किए हैं. जो ये कह रहे हैं कि उन्होंने दस्तख़त नहीं किए हैं या तो वे भूल गए हैं या फिर कोई और वजह है."

पत्र के अमरीका में एक मुस्लिम समूह द्वारा मीडिया को देने के संबंध में उन्होंने कहा,"हमने इस पत्र की कॉपी सात महीने पहले जब यह भेजा गया था तब भी मीडिया को दी थी लेकिन उस वक्त इस पत्र के बारे में किसी ने कुछ नहीं लिखा था. अब राजनाथ मोदी के लिए वीजा माँग रहे हैं तो इस पत्र के बारे में लिखा जा रहा है."

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