सिब्बल ने उठाया योजना आयोग पर सवाल

कपिल सिब्बल
Image caption कपिल सिब्बल ने योजना आयोग के ग़रीबी निर्धारण के तरीके पर सवाल उठाया.

केन्द्रीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने योजना आयोग की ग़रीबी की परिभाषा तय करने के तरीके की आलोचना की है. सिब्बल ने शुक्रवार को कहा कि पाँच लोगों का परिवार पाँच हज़ार में भी गुजारा नहीं कर सकता.

सिब्बल ने कहा, “यदि योजना आयोग कहता है कि, जो परिवार महीने में पाँच हज़ार रुपए खर्च करते हैं वो ग़रीब नहीं है, तो इस देश में ग़रीबी को परिभाषित करने के तरीके में कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है.”

कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान सिब्बल ने योजना आयोग के गरीबी रेखा के निर्धारण के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा, “कोई परिवार पाँच हज़ार में कैसे जी सकता है ?”

वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने ट्वीटर पर जारी किए गए एक बयान में कहा, "मैं योजना आयोग के ग़रीबी रेखा के निर्धारण के मानकों को समझने में असमर्थ हूँ...ये बहुत ही अमूर्त हैं और सभी इलाकों के लिए एक ही पैमाना नहीं लागू किया जा सकता."

दिग्विजय ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि "पहले ग़रीबी की पहचान किसी परिवार में कुपोषण और ख़ून की कमी का स्तर होता है, जिसे आसानी से मापा जा सकता है"

साथ ही दिग्विजय ने यह भी पूछा कि क्या हम कुपोषण और ख़ून की कमी को ग़रीबी रेखा का मानक नहीं मान सकते ?

ग़रीबी रेखा

योजना आयोग ने इसी हफ्ते कहा था कि भारत में ग्रामीण क्षेत्र में 4,080 रुपए प्रति माह और शहरी क्षेत्र में 5,000 रुपए प्रति माह से ज़्यादा खर्च करने वाला पाँच लोगों का परिवार ग़रीब नहीं माना जाएगा.

तेंदुलकर समिति की सुझाई विधि के आधार पर योजना आयोग ने गाँवों के लिए ग़रीबी की रेखा 816 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति माह खर्च और शहरों के लिए 1000 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति माह खर्च तय की है.

इसके पहले कांग्रेस के सांसद राज बब्बर ने कहा था कि मुम्बई में किसी व्यक्ति को 12 रुपए में भर पेट खाना मिल सकता है. जबकि कांग्रेस के सांसद रशीद मसूद ने कहा था कि दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में 5 रुपए में खाना खाया जा सकता है.

इन दोनों बयानों की विपक्षी राजनीतिक दलों और भारतीय मीडिया ने तीखी आलोचना की है.

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