छठी ग्रामसभा में भी गिरा खनन का प्रस्ताव

ग्राम सभा
Image caption सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ओडिशा सरकार 12 गाँवों में ग्रामसभा करा रही है.

ओडिशा में रायगडा ज़िले के बातूड़ी गाँव में हुई ग्राम सभा की बैठक ने नियामगिरि पर्वत में बॉक्साइट खनन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया है. यहां ब्रितानी वेदांता कंपनी एल्यूमिनियम प्लांट लगाना चाहती है.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल के अपने एक फ़ैसले में आदिवासियों के 'पवित्र पर्वत' पर खुदाई की इजाज़त देने या नकारने का फ़ैसला ग्राम सभाओं पर छोड़ दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने नियामगिरि के इर्द-गिर्द बसे रायगडा और कालाहांडी ज़िलों के 12 गावों में ग्राम सभा के गठन की घोषणा की.

इस क्रम में पहली ग्रामसभा रायगडा ज़िले के सेरकापाड़ी गाँव में 18 जुलाई को हुई. इसमें प्रस्ताव को सर्वसम्मति से ख़ारिज कर दिया गया. शनिवार को इस कड़ी में छठी ग्रामसभा बातूड़ी गाँव में हुई. अब तक हुई तमाम ग्रामसभाओं में ग्रामीणों ने यह प्रस्ताव ख़ारिज ही किया है.

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Image caption इससे पहले हुई पाँच ग्रामसभाओं में भी खनन प्रस्ताव ख़ारिज हो गया है.

स्थानीय भाषा में ग्रामसभा की बैठक को पल्ली सभा कहा जाता है. शुक्रवार को हुई सभा में सदस्यों ने कुई भाषा में अपनी बात रखी, जिसे अनुवादक की मदद से अधिकारियों को समझाया गया. अधिकारियों ने उड़िया भाषा में तैयार दस्तावेज पर ग्रामीणों के दस्तख़त और अंगूठे के निशान भी लिए.

नियामगिरी सुरक्षा समिति के कार्यकर्ता भालचंद्र सडन्गी ने बीबीसी को बताया, "आने वाले दिनों में होने वाली ग्रामसभाओं में भी यह प्रस्ताव गिरने की संभावना है. सरकार बड़ी बेईमानी से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अपने तरीक़े से मतलब निकालते हुए 112 गाँव के बजाय सिर्फ 12 गाँवों में ही ग्राम सभाएं आयोजित करवा रही है. लेकिन इसमें भी सरकार कामयाब होती नहीं दिख रही है. नियामगिरी के लोगों ने प्रस्ताव गिराने का मन बना लिया है."

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देवता

सभा में मौजूद प्रकाश कारसिका ने कहा, "नियामगिरी हमारे देवता हैं और उन्हीं से हमारी संस्कृति और जीवनयापन जुड़ा है. अगर यहाँ बॉक्साइट खनन होगा तो इससे सारी नदियाँ और नालें सूख जाएंगे और पर्यावरण को नुकसान पहुँचेगा. हम किसी भी सूरत में अपने पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाने देंगे."

नियामगिरि सुरक्षा समिति ने घोषणा की है कि वह 112 गावों में ग्राम सभा आयोजित करेगी और बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग और उनमें पारित प्रस्ताव केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के पास भेजेगी.

Image caption नियामगिरी पर्वत पर बसे आदिवासी खनन का विरोध करते रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि नियामगिरि में खनन पर पर्यावरण मंत्रालय की पाबंदी के कारण पर्वत के पास कालाहांडी ज़िले के लांझीगढ़ में वेदांता द्वारा लगाई गई एक मिलियन टन की रिफ़ाइनरी पांच दिसंबर 2012 से ही बंद पड़ी है.

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प्लांट पर ख़तरा

अगर वेदांता को नियामगिरि में खुदाई की अनुमति नहीं मिलती तो न केवल यह रिफ़ाइनरी बल्कि झारसुगुड़ा में कंपनी के स्मेल्टर प्लांट के भी बंद होने की नौबत आ जाएगी और कंपनी द्वारा चालीस हज़ार करोड़ की लागत पर बनी यह पूरी परियोजना ख़तरे में पड़ जाएगी.

2003 में वेदांता और राज्य सरकार के उपक्रम ओडिशा माइनिंग कंपनी या ओएमसी के बीच समझौते के अनुसार वेदांता अगले 30 साल में क़रीब 150 मिलियन टन बॉक्साइट का खनन करने वाली थी.

स्थानीय डोंगरिया कोंध आदिवासियों के विरोध और अदालत में चल रहे मामलों के कारण कंपनी अभी तक यहां से एक ग्राम बॉक्साइट भी नहीं निकाल पाई है.

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