आईएएस के निलंबन पर गरमाई यूपी की राजनीति

  • 29 जुलाई 2013
अखिलेश
Image caption विपक्षी दलों का आरोप है कि अखिलेश सरकार भ्रष्ट अधिकारियों को शह दे रही है.

उत्तर प्रदेश आईएएस एसोसिएशन ने गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में तैनात अपनी एक साथी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर विरोध दर्ज कराया है और इसे रद्द करने की मांग की है.

सरकार का कहना है कि नागपाल को ग्राम कादलपुर थाना रबुपुरा में एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए और अदूरदर्शी तरीके से हटवाने के कारण निलंबित किया गया है. सरकार के मुताबिक़ इस फैसले से साम्प्रदायिक वातावरण प्रभावित हो रहा था.

दूसरी ओर ख़बरों में कहा गया है कि तेज़तर्रार महिला आईएएस अधिकारी ने हाल ही में बालू खानन माफिया के खिलाफ अभियान छेडा था और उन्हें माफिया के दबाव में ही हटाया गया है.

विपक्षी दलों के अलावा मीडिया ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है.

एसोसिएशन की मांग

आईएएस एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने कार्यवाहक मुख्य सचिव आलोक रंजन से मुलाकात कर नागपाल का निलंबन समाप्त करने की मांग की.

एसोसिएशन के सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा ने पत्रकारों को बताया, "परिस्थितियों को देखते हुए निलंबन समाप्त करने की मांग की गई है."

रंजन का कहना है कि एसोसिएशन का यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा. उनके अनुसार एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि निलंबन समाप्त कर अधिकारी के ख़िलाफ़ आरोपों की जांच करा ली जाए.

लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस निलंबन को उचित ठहराया है. रविवार को बंगलौर के दौरे पर उन्होंने पत्रकारों से कहा, “साम्प्रदायिक तनाव रोकने और इस तरह के विवाद बचाने के लिए कभी- कभी इस तरह के निर्णय लेने पड़ते हैं.”

मगर एक अधिकारी का कहना है कि संभवतः मुख्यमंत्री को नागपाल के कार्यों के संबंध में पूरी जानकारी नही दी गई थी, इसलिए इस तरह का फ़ैसला हुआ है.

जानकार लोगों का कहना है कि शायद यह पहला मामला है जब एक एसडीएम स्तर के एक जूनियर आईएएस अधिकारी को इस तरह निलंबित किया गया है.

इससे पहले मायावती सरकार में भी कई अफसर निलंबित किए गए थे, लेकिन उस समय आईएएस एसोसिएशन बिलकुल निष्क्रिय हो गया था. अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद एसोसिएशन फिर सक्रिय हुआ है.

विपक्ष का विरोध

Image caption मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने भी राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं

उधर सरकार की दलीलें विपक्षी दलों के गले नहीं उतर रही हैं. राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी बहुजन समाज पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि सरकार ईमानदार अधिकारियों को निलंबित कर रही है या उनका तबादला कर रही है.

उन्होंने कहा कि खनन माफियाओं के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने वाली नागपाल को निलंबित किया गया है जबकि नोएडा में पशुओं की तस्करी करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने वाले आईपीएस अधिकारी नवनीत राणा का तबादला कर दिया गया है.

भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “राज्य (उत्तर प्रदेश) में क़ानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है. वहां गुंडाराज़ और माफियाराज़ है. सरकार भ्रष्ट नेताओं का साथ दे रही है और ईमानदार अधिकारियो को सज़ा दे रही है.”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पूनिया ने कहा, “नागपाल के निलंबन से अधिकारियों में गलत संदेश जाएगा. इससे उनका मनोबल गिरेगा और राज्य में क़ानून व्यवस्था खराब होगी. सरकार की कार्रवाई से माफिया में ख़ुशी की लहर है.”

राष्ट्रीय लोकदल की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने कहा, “दुर्गा शक्ति नागपाल को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि खनन माफिया के ख़िलाफ़ उनकी कार्रवाई से कई लोगों के हित प्रभावित हुए हैं. इनमें कुछ राजनेता भी शामिल हैं.”

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