कितने और बंद ढक्कन खोलेगा तेलंगाना?

मायावती

तेलंगाना को भारत का 29वाँ राज्य बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने छोटे राज्यों की स्थापना की माँग फिर से उठा दी है.

इसके साथ ही देश में अलग अलग जगहों पर बरसों से पृथक राज्यों की माँग ज़ोर पकड़ने की संभावना बढ़ गई है.

बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटा जाना चाहिए और साथ ही गोरखालैंड और विदर्भ राज्य की माँग भी माँगी जानी चाहिए.

उत्तर प्रदेश में जब वो मुख्यमंत्री थीं तब उन्होंने राज्य को चार हिस्सों में बाँटने का प्रस्ताव रखा था.

आज उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बाँटने की माँग केंद्र सरकार के पास लंबित पड़ी है और अब उसे इसे स्वीकार करते हुए गोरखालैंड और विदर्भ जैसे राज्यों को स्थापित करना चाहिए और उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बाँटकर इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए.”

उन्होंने माँग की है कि केंद्र सरकार में उत्तर प्रदेश के मंत्रियों को भी उत्तर प्रदेश से चार छोटे राज्य बनाने की माँग उठानी चाहिए. उन्होंने कहा, “हवाई बयानबाज़ी करने की बजाए इस मामले पर केंद्र सरकार की मोहर लगवानी चाहिए और दबाव डालना चाहिए.”

गोरखालैंड

Image caption तेलंगाना के बाद गोरखालैंड की माँग फिर उभर आई है.

तेलंगाना पर काँग्रेस कार्यसमिति की घोषणा होने के बाद पश्चिम बंगाल के पर्वतीय हिस्से में भी पृथक गोरखालैंड की माँग के लिए एक नौजवान ने आत्मदाह कर लिया. गोरखा जनमुक्ति मोर्चे से जुड़े मंगल सिंह राजपूत की स्थिति गंभीर बनी हुई है.

उधर दार्जिलिंग में गोरखालैंड स्वायत्तशासी संस्था के प्रमुख बिमल गुरुंग ने भी अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. इस संस्था का गठन दो साल पहले किया गया था. अस्सी के दशक में गोरखालैंड की माँग को लेकर पश्चिम बंगाल के पर्वतीय इलाक़ों में सुभाष घिसिंग के नेतृत्व में ज़बरदस्त आंदोलन चला था.

केंद्र में राजीव गाँधी की सरकार के दौरान 1988 में एक समझौते के तहत दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल का गठन हुआ था पर दो साल पहले इसके बदले गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन बनाया गया.

हरित प्रदेश या ब्रज प्रदेश

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड, हरियाणा और राजस्थान की सीमा से लगे 22 ज़िलों को मिलाकर एक अलग प्रदेश बनाए जाने की माँग नई नहीं है. ख़ास तौर पर राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह इसके सबसे प्रबल समर्थक हैं.

उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े सूबे का प्रशासन चलाना अपने आप में एक चुनौती भरा काम है, इसलिए छोटे प्रदेशों की ज़रूरत है. इस माँग को बहुजन समाज पार्टी ने भी समर्थन दिया है. राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा नेता मायावती ने तो समूचे उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने का प्रस्ताव तक रखा था.

पूर्वांचल

उत्तर प्रदेश के पूर्वी ज़िलों को मिलाकर एक राज्य बनाने की माँग भी जब तक उठती रहती है. इस इलाक़े से 23 सांसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा में 114 विधायक चुने जाते हैं.

कुछ संगठन पड़ोसी राज्य बिहार के भोजपुर जैसे पश्चिमी ज़िलों को भी पूर्वांचल राज्य में मिलाने की माँग करते हैं.

बुंदेलखंड

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बँटे बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा देने की माँग नई नहीं है. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस माँग पर मोहर लगाकर अलग प्रदेश की माँग कर रहे संगठनों की उम्मीदें बढ़ा दीं.

फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड के सात ज़िले झाँसी, जालौन, बाँदा, चित्रकूट, महोबा, ललितपुर और हमीरपुर पड़ते हैं और मध्य प्रदेश में टीकमगढ़, पन्ना, सागर, दमोह, दतिया और छतरपुर ज़िले हैं.

विदर्भ प्रदेश

भारत में जब जब किसानों की आत्महत्या की ख़बरें आती हैं सबसे पहले ध्यान विदर्भ की ओर ही जाता है. इस इलाक़े में अब तक लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार विदर्भ के लोगों के साथ न्याय नहीं कर पाती और न ही विदर्भ का ठीक से प्रतिनिधित्व हो पाता है.

महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्सों में नागपुर और अमरावती अंचल को मिलाकर विदर्भ प्रदेश बनाने की माँग का समर्थन करने वाले नेता काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों में मौजूद हैं.

काँग्रेस के एनकेपी साल्वे और वसंत साठे विदर्भ प्रदेश के प्रबल समर्थकों में रहे. राजीव गाँधी के प्रधानमंत्रित्व काल में इस सिलसिले में गंभीर कोशिशें भी हुईं. केंद्र सरकार ने अलग विदर्भ प्रदेश की संभावना तलाशने के लिए प्रतिनिधि भेजे थे जिन्होंने अनुकूल रिपोर्ट दी थी. लेकिन उसके बाद इस संदर्भ में कोई प्रगति नहीं हुई.

और भी हैं माँगें...

इन बड़े आंदोलनों के अलावा बिहार और झारखंड मैथिलभाषी इलाक़ों को मिलाकर अलग मिथिलांचल और कर्नाटक में कूर्ग प्रदेश या फिर झारखंड में कोल्हान राष्ट्र की माँग भी समय समय पर अख़बारों की सुर्खियाँ बनती रही हैं.

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