दुर्गा मामले पर यूपी और केंद्र सरकार आमने-सामने

  • 5 अगस्त 2013
दुर्गा शक्ति नागपाल
Image caption 29 जुलाई को दुर्गा शक्ति को उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया था

उत्तर प्रदेश की निलंबित आईएएस अफ़सर दुर्गा शक्ति नागपाल को लेकर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार आमने-सामने आ गई है. केंद्र ने कहा है कि अगर निलंबित अफ़सर सीधे उन्हें शिकायत भेजती हैं तो केंद्र इसमें दखल दे सकता है.

इस पर समाजवादी पार्टी ने सोमवार को चेतावनी भरे लहज़े में कहा है कि अगर केंद्र सरकार चाहे तो राज्य से सभी आईएएस अफ़सरों को वापस बुला सकती है.

मॉनसून सत्र की शुरुआत के पहले दिन सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दुर्गा शक्ति नागपाल के मामले में ‘नियमों का पालन किया जाएगा’. उनका कहना था कि केंद्र ने राज्य सरकार से पूरे मामले की जानकारी मांगी है.

इससे पहले सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर यह सुनिश्चित करने को कहा था कि दुर्गा शक्ति के साथ न्याय किया जाए और क़ानून को स्थापित करने में जुटे अफ़सरों के हितों को सुरक्षित किया जाए.

'अपील का हक़'

उधर कार्मिक राज्यमंत्री वी नारायणस्वामी का कहना है कि नियमों के मुताबिक़ निलंबित अफ़सर को अपील का अधिकार हासिल है.

नारायणस्वामी ने कहा है, ''उन्होंने (दुर्गा शक्ति नागपाल ने) अभी तक हमसे संपर्क नहीं किया है. अगर वह हमारे समक्ष अपील करती हैं, तो हम इसकी प्रति राज्य सरकार को भेजकर उनका जवाब मांगेंगे. इसके बाद हम अगली कार्रवाई पर विचार करेंगे. आमतौर पर एक अफ़सर राज्य सरकार को संपर्क करता है...हम अपनी तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं कर सकते.''

वहीं समाजवादी पार्टी नेता रामगोपाल यादव ने केंद्र से कहा है, "अगर केंद्र का यही रुख है तो उत्तर प्रदेश यह कहेगा कि हमें कोई आईएएस अफ़सर नहीं चाहिए. केंद्र अपने सारे अफ़सरों को बुला ले, हम अपने अफ़सरों से राज्य को चला लेंगे.''

'ग़लती की तो सज़ा मिलेगी'

Image caption उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दुर्गा शक्ति के निलंबन को सही ठहरा रहे हैं

उधर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी सोमवार को दुर्गा शक्ति के निलंबन को सही ठहराया.

लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा, ''बहुत से बच्चे हैं जिनके माता-पिता और शिक्षक उन्हें उनकी ग़लतियों के लिए सज़ा देते हैं. इसी तरह सरकारें काम करती हैं. अगर कोई अफ़सर ग़लती करता है तो उसे भी सज़ा मिलेगी.''

अखिलेश का कहना था, "जब भी सरकार कोई फ़ैसला लेती है, तो हर कोई विरोध करता है. पिछले दिनों कई आईएएस अफ़सरों के साथ घटनाएं हुई हैं. हमारे समय में वो हमेशा आराम से काम करते रहे हैं, जबकि बीएसपी के कार्यकाल के दौरान उन्हें दफ़्तरों में घुसने से पहले जूते उतारने पड़ते थे.''

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने दुर्गा शक्ति नागपाल को खुलकर अपना समर्थन दिया है. उनका कहना है कि यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे उत्तर प्रदेश सरकार फेल हो चुकी है.

संसद के बाहर सोमवार को मायावती ने कहा, ''दुर्गा शक्ति नागपाल के केस से ज़ाहिर होता है कि समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में ‘गुंडा राज’ हो गया है.''

2009 बैच की आईएएस अफ़सर दुर्गा शक्ति नागपाल को 29 जुलाई को उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार ने निलंबित कर दिया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक धर्मस्थल की दीवार गिराकर सांप्रदायिक तनाव का माहौल पैदा कर दिया था.

बताया जाता है कि दुर्गा शक्ति नोएडा में रेत माफ़िया के खिलाफ अभियान छेड़े हुए थीं. राज्य सरकार ने दुर्गा शक्ति नागपाल को चार्जशीट जारी करते हुए 15 दिन में जवाब देने को कहा है.

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