कश्मीरी लड़की के सपनों की उड़ान में पासपोर्ट बाधा

कश्मीर लड़की को नहीं मिला पासपोर्ट
Image caption सुफ़ीरा एक अनाथालय में रहती हैं

भारत-प्रशासित कश्मीर की 15 साल की सुफ़ीरा नज़ीर पूरे भारत से चुने गए उन 40 बच्चों में से एक हैं जिन्हें एक एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत एक साल के लिए अमरीका जाने का मौका मिला था.

लेकिन उनके हाथ से ये सुनहरा अवसर शायद निकल जाए.

दरअसल सुफ़ीरा ने एक्सचेंज प्रोग्राम के लिए चुने जाने के बाद इस साल अप्रैल में पासपोर्ट के लिए आवेदन दिया और बस यहीं पर उनकी राह में रुकावट आ गई.

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सुफ़ीरा को पासपोर्ट जारी नहीं किया गया और इसकी वजह बताई गई एक समय में उनके चाचा का चरमपंथी होना.

सुफ़ीरा का सपना

सुफ़ीरा कहती हैं, “ये मेरा सपना है कि मैं अमरीका जाऊं और वहां से नई चीजें सीख कर आऊं और उन्हें कश्मीर के लोगों के साथ साझा करूं.”

सुफ़ीरा का पालन पोषण एक ग़ैरसरकारी संस्था के अनाथालय में हुआ है.

इस अनाथालय से जुड़े ज़हूर अहमद टाक ने बताया, “अप्रैल में आवेदन के बाद से ये केस लटका हुआ है. पासपोर्ट के लिए जम्मू कश्मीर सरकार को क्लीयरेंस देनी होती है."

वो कहते हैं, "सीआईडी विभाग ने हमें बताया कि बच्ची के चाचा चरमपंथी रहे हैं. हालांकि उन्होंने अब आत्मसमर्पण किया हुआ है और वो अब सामान्य जीवन गुजार रहे है. इस बच्ची को उसके चाचा के गुनाहों की सजा दी जा रही है जबकि इसका उनसे कोई लेना देना नहीं है.”

वहीं राज्य सरकार ने इस बात से इंकार किया है कि सुफ़ीरा को पासपोर्ट जारी न करने की वजह उसके चाचा का चरमपंथ से जुड़ा होना है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के मुख्य सचिव तनवीर सादिक़ सरकार पर लगे इलज़ाम से इंकार करते हैं.

रिजेक्ट नहीं हुआ पासपोर्ट

Image caption सुफीरा को पासपोर्ट का अब भी इंतजार है

उनका कहना है, “हमारी सरकार ने 2010 में ही कह दिया है कि जिन छात्रों या लोगों की उग्रवाद में कोई भागीदारी नहीं है, उनका पासपोर्ट नहीं रुकेगा. जहां तक इस मामले का संबंध है तो उसमें कुछ देर हुई है. मीडिया में उन्होंने कह दिया कि रिजेक्ट हो गया है, लेकिन रिजेक्ट नहीं हुआ है.”

सुफ़ीरा को इस महीने की शुरुआत में ही अमरीका के लिए रवाना होना था और समय पर पासपोर्ट नहीं मिलने से वो निराश हैं. जब बीबीसी ने उन्हें बताया कि शायद जल्द ही उन्हें उनका पासपोर्ट मिल जाए, तो उनके जवाब में उम्मीद के साथ ही एक डर भी था.

वो कहती हैं, “अगर पासपोर्ट मिल भी जाए तो अमरीका जाने का मौका तो मेरा निकल गया न. हालांकि पासपोर्ट मिल गया तो उस प्रोग्राम के अधिकारियों से बात करके शायद अभी भी काम बन जाए और अगर नहीं मिला तो इसके लिए सरकार को ही दोष दिया जाएगा.”

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