आंदोलन की मार दार्जीलिंग चाय के निर्यात पर

Image caption आन्दोलन के चलते यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे दार्जीलिंग चाय का निर्यात रुक गया है.

गोरखालैंड को एक अलग राज्य बनाने के लिए चल रहे आंदोलन के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध दार्जीलिंग चाय का निर्यात रुक गया है. क्षेत्र में अशांति की वजह से दार्जीलिंग चाय की बिक्री भारत के अंदर भी ठप पड़ गई है.

दार्जीलिंग चाय की सालाना बिक्री 400 करोड़ रूपए है, जिसका 70 फ़ीसदी हिस्सा निर्यात से आता है.

दार्जीलिंग चाय संघ के एक पदाधिकारी संदीप मुखर्जी कहते हैं, "मामला काफी गंभीर है. कुछ देशों ने अपने ऑर्डर रद्द करने की धमकी दी है."

दार्जीलिंग चाय का निर्यात कई देशों में होता है जिनमें ब्रिटेन, जापान और अमरीका ख़ास हैं.

संदीप कहते हैं, "फिलहाल चाय अलग-अलग गोदामों में पड़ी है लेकिन अगर इसकी बिक्री दोबारा जल्द शुरू न हुई तो इसका असर सीधे मज़दूरों पर पड़ेगा."

मज़दूरों का संकट

वो कहते हैं, "अगर ये हड़ताल कुछ और दिन जारी रही तो चाय बागानों के मज़दूरों को दिहाड़ी देने के लिए पैसे भी नहीं बचेंगे."

मज़दूरों को हर शनिवार मज़दूरी दी जाती है.

संदीप कहते हैं " आंदोलन के कारण हम उन्हें अधिक दिनों तक पैसे नहीं दे सकते और अगर मज़दूरों को वेतन न मिला तो कुछ बागानों में हिंसा हो सकती है."

दार्जीलिंग के चाय बागानों में करीब 70,000 मजदूर काम करते हैं. संदीप के अनुसार इन मज़दूरों के आंदोलन में शामिल होने का भी खतरा बढ़ गया है.

अलग राज्य की मांग

Image caption दार्जीलिंग में अलग राज्य की मांग के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

पश्चिम बंगाल के दार्जीलिंग क्षेत्र को अलग राज्य बनाने की मांग पुरानी है. तेलंगाना को एक अलग राज्य का दर्जा देने के फैसले के बाद गोरखालैंड राज्य की मांग फिर से दुहराई जा रही है.

गोरखालैंड जनमुक्ति मोर्चा ने तीन अगस्त से हड़ताल शुरू की है जो अब भी जारी है. आंदोलनकारियों ने चाय बागानों को हड़ताल के दौरान पैदावार जारी रखने की अनुमति दी हुई है.

संदीप कहते हैं, "उत्पादन जारी है लेकिन हड़ताल के कारण चाय को बाज़ार तक नहीं पहुंचा सकते. इसलिए माल गोदामों में पड़ा हुआ है."

दरअसल अगल राज्य की मांग से यातायात काफी प्रभावित हुआ है और गाड़ियाँ जहाँ-तहाँ रुकी हुई हैं.

दार्जीलिंग चाय की सालाना पैदावार एक लाख क्विंटल है, जिसका दो तिहाई भाग निर्यात होता है.

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