तेलंगाना के विरोध में जगन रेड्डी का इस्तीफ़ा

Image caption तेलंगाना के विरोध में जगन रेड्डी ने सांसद पद से इस्तीफ़ा दे दिया है

वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष वाईएस जगमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश को अलग कर तेलंगाना राज्य बनाने के कॉंग्रेस के निर्णय के बाद सांसद पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. वह रायलसीमा क्षेत्र के कडप्पा जिले से सांसद हैं.

जगन इस समय भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत जेल में है. पीटीआई के मुताबिक उन्होंने जेल अधिकारियो से अपना इस्तीफ़ा लोकसभा स्पीकर को फैक्स के ज़रिए भेज दिया है.

इसके साथ ही जगन की माँ और पार्टी की मानद अध्यक्ष विजयलक्ष्मी ने भी पुलिवेन्दुला विधानसभा सीट से इस्तीफ़ा दे दिया है.

पार्टी तेलंगाना के विरोध कर रही है, और इसके सांसद एम राजमोहन रेड्डी समेत 16 विधायक पहले ही इस्तीफ़ा दे चुके हैं. इस कदम के बाद तेलंगाना क्षेत्र में पार्टी के ज़्यादातर नेता और कार्यकर्ता नाराज़ हैं.

कैसे बनी वाईएसआर कांग्रेस

पिछले लगभग साढ़े तीन वर्ष से आंध्र प्रदेश की पूरी राजनीति केवल एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूम रही है और वो हैं वाईएस जगमोहन रेड्डी. जब से मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी का सितम्बर 2009 में एक हवाई दुर्घटना में निधन हुआ, जगन सबके ध्यान का केंद्र बने हुए हैं.

पिता की जगह खुद मुख्यमंत्री बनने का दावा करने से लेकर अब तक जगमोहन रेड्डी ने काफी लंबा राजनीतिक सफर तय किया है जिसमें वो न केवल पूरी तरह से कांग्रेस के विरोधी बन गए बल्कि उन्होंने खुद अपनी अलग पार्टी वाईएसआर कांग्रेस भी बना ली .

उसके टिकट पर वो खुद लोक सभा के लिए चुने गए और उन्होंने बहुत ही कम समय में वाईएसआर कांग्रेस को कांग्रेस की मुख्य विरोधी पार्टी बना दिया है.

दूसरी और उनकी बगावत ने कांग्रेस को आंध्र प्रदेश के सुरक्षित किले में काफी कमजोर कर दिया है और कांग्रेस लगातार राज्य पर अपनी पकड़ खोती जा रही है.

कांग्रेस से दूरी के साथ साथ खुद जगनमोहन रेड्डी के लिए काफी कानूनी समस्याएँ भी खड़ी हो गई हैं.

राजनीतिक सफर

चालीस वर्षीय जगन की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पहली बार 2004 के आखिर में दिखी, जब उन्होंने कड़प्पा से सांसद बनने की इच्छा जताई, लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने उन्हें घास नहीं डाली.

अपना सपना पूरा करने के लिए उन्हें 2009 तक का इंतजार करना पड़ा. जब उन्होंने कड़प्पा लोकसभा सीट जीतकर राजनीति में कदम रखा.

लेकिन उसी साल सितंबर में उनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत ने जगन मोहन के लिए सब कुछ बदल कर रख दिया.

जगन मोहन रेड्डी अपने पिता के बाद आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन ज्यादातर विधायकों की रजामांदी के बावजूद कांग्रेस हाई कमान उन्हें यह पद देने के पक्ष में नहीं थी.

सत्ताधारी पार्टी से अलग उन्होंने स्वतंत्र रूप से अपने राजनीतिक करियर के लिए ओडारपू यात्रा की. उन्होंने कई गाँवों और जिलों की यात्रा की.

राज्य में जगन की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ा. कांग्रेस ने उनकी यात्रा पर आपत्ति की, तो जगन ने पार्टी ने नाता तोड़ने का फैसला किया.

पार्टी और जगन मोहन के बीच टकराव नवंबर 2010 में और बढ़ा, जब कांग्रेस ने के रोसैया की जगह एन किरण कुमार रेड्डी को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया.

29 नवंबर 2010 को जगन ने आखिरकार पार्टी छोड़ने का फैसला किया और लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया. मार्च, 2011 में जगन मोहन रेड्डी ने वाईएसआर कांग्रेस के गठन की घोषणा की.

मई 2011 में हुए कड़प्पा उप चुनाव में जगन मोहन रेड्डी रिकॉर्ड अंतर से जीते. जबकि उनकी माँ वाईएस विजया ने पुलिवेन्दुला विधानसभा सीट से शानदार जीत हासिल की.

कांग्रेस के लिए मुश्किल

कांग्रेस की राज्य सरकार उस समय एक बड़े संकट के दौर से गुजरी जब उसके 16 विधायकों ने जगन मोहन का समर्थन करते हुए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान दिया था. लेकिन प्रजा राज्यम और मजलिस पार्टियों ने सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी.

फिर उपचुनाव में कांग्रेस सभी सात सीटें हार गई. इनमें से छह सीटें तेलंगाना और एक सीट तटीय आंध्र में थी. तटीय आंध्र में एकमात्र सीट जीतकर वाईएसआर कांग्रेस ने कांग्रेस और तेलुगूदेसम पार्टी को चौंका दिया.

आंध्र प्रदेश उच्य न्यायालय के आदेश पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो और एन्फोर्समेंट निदेशालय ने इस बात की छानबीन की है किस तरह जगनमोहन रेड्डी की संपत्ति पांच वर्ष से भी कम समय में 24 करोड़ रुपये से 470 करोड़ रूपए तक पहुंच गई और उनकी कई कंपनियों में पूँजी कहाँ से और कैसे आई.

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