आईएनएस अरिहंत का परमाणु रिएक्टर चालू

  • 11 अगस्त 2013
भारतीय नौसेना के जवान
Image caption भारत अबतक डीजल से चलने वाली पनडुब्बियों का संचालन करता था

भारत ने अपनी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत के रिएक्टर को सक्रिय कर दिया है. यह भारत में ही बनाई और डिजाइन की गई पहली परमाणु पनडुब्बी है.

इसके बाद इसे परीक्षण के लिए समुद्र में उतारा जाएगा.

इसकी तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस स्वदेशी तकनीकी क्षमता हासिल करने की दिशा में एक बड़ा क़दम बताया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है, जो परमाणु क्षमता संपन्न पाँच देशों के बाहर किसी ने बनाया है.

छठवाँ देश

पिछले साल रूस में बनी परमाणु पनडुब्बी को समुद्र में उतार कर भारत अमरीका. ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे परमाणु क्षमता संपन्न पनडुब्बियों का संचालन करने वाले देशों के क्लब में औपचारिक रूप से शामिल हो गया था.

परमाणु पनडुब्बी भारत की रक्षा क्षमताओं में एक तीसरा आयाम जोड़ेगी. इसके पहले वह केवल हवा और ज़मीन से ही बैलिस्टिक मिसाइलें छोड़ने में सक्षम था.

बीबीसी संवाददाता जोनाथम मारकस का कहना है कि समुद्री परीक्षण के सफलतापूर्वक हो जाने के बाद भारत की परमाणु क्षमता संपन्न पनडुब्बी अगले दो साल में काम करने लगेगी.

इसे जब तैनात किया जाएगा तो अरिहंत सौ नाविकों को ले जाने में सक्षम होगी.

यह बहुत लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकती है और इस दौरान इसका आसानी से पता भी नहीं लगाया जा सकता है.

पुराना सहयोगी

इसके विपरीत भारत की डीजल से चलने वाली पारंपरिक पनडुब्बियों को अपनी बैटरियों को रिचार्ज करने के लिए बार-बार पानी के सतह पर आना पड़ता है.

पिछले साल रूस में बनी और एक अरब डॉलर की कीमत वाली पनडुब्बी आईएनएस चक्र को अगले 10 साल के लिए समुद्र में उतारा गया था.

भारत 1991 तक रूसी पनडुब्बियों का संचालन करता था.

भारत और रूस पिछले काफी लंबे समय से सहयोगी हैं. रूस भारतीय सेना के 70 फीसद साजो-सामान की आपूर्ति करता है.

उम्मीद की जा रही है कि रूस आइएनएस के चालक दल के सदस्यों के प्रशिक्षण में भारत की मदद करे. आईएनएस चक्र के चालक दल ने गोपनीय रूप से सेंट पिट्सबर्ग मे प्रशिक्षण लिया था.

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