क्या अहम मुद्दों पर संसद में हो पाएगी चर्चा?

किश्तवाड़ में शुक्रवार को हिंसा शुरू हुई थी. इस हिंसा में तीन लोग मारे गए.
Image caption किश्तवाड़ में शुक्रवार को हिंसा शुरू हुई थी. इस हिंसा में तीन लोग मारे गए.

संसद की कार्यवाही इस हफ्ते सिर्फ तीन दिन होगी. इनमें से एक दिन निकल गया है. इसके बाद 15 अगस्त से छह दिन की छुट्टी. यानी 21 अगस्त को कार्यवाही फिर शुरू होगी. हो सकता है तब तक स्थितियाँ सुधरें. निर्भर इस बात पर करेगा कि सरकार की दिलचस्पी किन विधेयकों को पास कराने में है.

हालांकि कुछ दिन के विराम के बाद संसद का ध्यान नियंत्रण रेखा से ज़रूर हटा है, पर संसदीय कार्य जम्मू-कश्मीर पर ही केन्द्रित रहा है.

पुंछ में सैनिकों की हत्या और अब किश्तवाड़ की हिंसा को लेकर इस हफ्ते भी गहमा-गहमी जारी रहे तो आश्चर्य नहीं. चूंकि नियंत्रण रेखा से लगातार गोलाबारी की खबरें आ रहीं हैं, इसलिए यह मसला फिलहाल महत्वपूर्ण बना रहेगा. तेलंगाना का भी तड़का बीच-बीच में लगेगा. वामपंथी पार्टियाँ केरल के सोलर घोटाले को लेकर आक्रामक हैं.

उम्मीद थी कि लोकसभा खाद्य सुरक्षा विधेयक पर विचार करेगी, पर ऐसा हो नहीं पाया. सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक और सेबी संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश हो गए. संसद के इस सत्र का यह पाँचवाँ दिन था.

आरटीआई संशोधन

Image caption खाद्य सुरक्षा विधेयक पर भाजपा की सहमति है.

विधायी काम के लिहाज़ से देखा जाए तो आरटीआई संशोधन विधेयक पेश हुआ है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों में आम सहमति है. पर नागरिक संगठन इसके पक्ष में नहीं हैं. फिर भी इस विधेयक को आसानी से पास हो जाना चाहिए.

मंगलवार को इस मामले पर और आपराधिक मामलों के कारण सदस्यता खत्म करने के अदालती निर्णय को लेकर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई है. खाद्य सुरक्षा विधेयक भी आसानी से पास होगा, क्योंकि इस पर भाजपा की सहमति है. सेबी को ज़्यादा अधिकार देने वाले अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेय़क भी इसी सत्र में पास होगा.

किश्तवाड़ की हिंसा

Image caption अरुण जेटली को राज्य प्रशासन ने किश्तवाड़ का दौरा नहीं करने दिया.

सोमवार का दिन मूलतः किश्तवाड़ की हिंसा में ही अटका रहा. अरुण जेटली को किश्तवाड़ जाने से रोके जाने को भाजपा ने बड़ा मसला बनाने की कोशिश की. साथ ही इसमें पाकिस्तान का हाथ दिखाने का प्रयास भी किया.

सोमवार को भी प्रश्नकाल नहीं हो सका. भाजपा सांसद बलबीर पुंज ने किश्तवाड़ के मामले को लेकर राज्य सभा में प्रश्नकाल-स्थगन का नोटिस दिया और कीर्ति आजाद ने लोकसभा में. राज्यसभा में प्रक्रियागत मसलों को लेकर उप सभापति पीजे कुरियन और वित्तमंत्री पी चिदम्बरम के बीच हल्की सी बहस और हो-हल्ला भी हुआ.

सोमवार को राज्यभा में कुछ समय के लिए असमंजस रहा, जब उप सभापति ने किश्तवाड़ की स्थिति पर बोलने के लिए विपक्ष के नेता अरुण जेटली को आमंत्रित किया. इसके पहले भाजपा सदस्यों ने माँग रखी थी कि जेटली को बोलने का अवसर दिया जाए, खासतौर से इसलिए कि रविवार को उन्हें किश्तवाड़ जाने से रोक दिया गया था.

पूर्वनियोजित थी किश्तवाड़ की हिंसा: उमर

जेटली को बोलने की अनुमति मिलने के बाद चिदम्बरम ने कहा, "सरकार की ओर से इस मामले में वक्तव्य तैयार है और उन्हें पहले वक्तव्य देने की अनुमति दी जाए"

कुरियन ने कहा, "जेटली को पहले बोलने की अनुमति दे दी गई है. वित्त मंत्री इसके बाद वक्तव्य दे सकते हैं."

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को वक्तव्य देना था तो इसकी सूचना पहले दे दी जाती. इस पर चिदम्बरम ने कहा, "मैं विनम्रतापूर्वक आसन के प्रति अपना विरोध दर्ज करवा रहा हूं. यह नई परिपार्टी है. सरकार का बयान पहले होना चाहिए."

चिदम्बरम और कांग्रेस के सदस्यों का विरोध और भाजपा सदस्यों के जबावी शोर के बाद सदन स्थगित हो गया.

पौने एक बजे के आसपास जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो प्रक्रिया को लेकर विवाद फिर शुरू हुआ. इस बीच मायावती और सीताराम येचुरी ने भी बोलने की इच्छा व्यक्त की.

कुरियन ने कहा, "सामान्यतः सदन में सरकार को वरीयता दी जाती है, पर चूंकि विपक्ष के नेता को बोलने के लिए आमंत्रित किया जा चुका है इसलिए उन्हें बोलने दिया जाए."

'केवल साम्प्रदायिक दंगा नहीं'

एक बजे के बाद जेटली बोले. उन्होंने कहा,"यह देश की सुरक्षा और सम्प्रभुता का मामला है. किश्तवाड़ में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच हिंसा का इतिहास नहीं है. सवाल है जिस समय नियंत्रण रेखा पर पाँच भारतीय सैनिकों की हत्या हुई हो, ऐसी घटना क्यों हुई? "

जेटली ने कहा, "यह साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगड़ने का मसला नहीं है. भारत के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान किसी दूसरे देश के झंडे का प्रदर्शन नहीं होता. आतंकवादियों के पोस्टर नहीं लगाए जाते."

चिदम्बरम ने तथ्यों को पेश करने के अलावा जेटली के इस अंदेशे को खारिज किया कि इस हिंसा में विदेशी या पाकिस्तानी हाथ है.

इस बीच रविशंकर प्रसाद ने कहा, "धारा 144 लगाए जाने का मतलब यह नहीं है कि अरुण जेटली जैसे महत्वपूर्ण व्यक्ति को रोका जाएगा."

चिदम्बरम का जवाब था, "मतलब यह भी नहीं कि किसी को भी राज्य सरकार या सेना के काम में हस्तक्षेप का अधिकार मिल जाएगा. किसी को भी मौके का फायदा उठाने नहीं देंगे."

'गुजरात क्या मोदी की सम्पत्ति'

Image caption अरुण जेटली के बयान और किश्तवाड़ मसले को नेशनल कांफ्रेस के नेता और केन्द्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सन 2002 के गुजरात दंगों से जोड़ा.

अरुण जेटली के बयान और किश्तवाड़ मसले को नेशनल कांफ्रेस के नेता और केन्द्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सन 2002 के गुजरात दंगों से जोड़ा और कहा, "तब सेना को आने नहीं दिया गया. गुजरात क्या मोदी की सम्पत्ति है?"

पर दोनों ही सदनों में केवल किश्तवाड़ के कारण ही सरगर्मी नहीं थी. सुबह दोनों सदनों में अचानक तेलंगाना को लेकर प्रदर्शन हुआ. लोकसभा में भी बैनर लेकर कुछ लोग घुस आए. दोनों सदन फौरन स्थगित हो गए.

केरल के सोलर घोटाले को लेकर वामपंथी दल व्यग्र हैं और आंध्र के दल अलग-अलग कारणों से तेलंगाना के सवाल को छोड़ना नहीं चाहते. यानी पार्टियों की वरीयता व्यावहारिक राजनीति में है.

अभी अनेक राजनीतिक प्रश्न संसद में नहीं उठे हैं. उत्तर प्रदेश का दुर्गाशक्ति नागपाल मामला, उत्तराखंड-आपदा, रॉबर्ट वाड्रा, सीबीआई की स्वतंत्रता, सीबीआई-आईबी विवाद, लगातार गिरता रुपया और महंगाई वगैरह-वगैरह. शायद मंगलवार को कुछ मसले उठें.

मॉनसून सत्र में अब तक का विधायी कार्य

लोकसभाः- विधेयक पेशः खाद्य सुरक्षा विधेयक 2013, सूचना का अधिकार (संशोधन) विधेयक 2013, सेबी संशोधन विधेयक 2013. राज्यभाः- विधेयक पासः कम्पनी विधेयक 2011

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