छत्तीसगढ़: पूर्व केंद्रीय मंत्री जूदेव का निधन

दिलीप सिंह जूदेव

भाजपा नेता और छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सांसद दिलीप सिंह जूदेव का बुधवार को निधन हो गया. उनका अंतिम संस्कार उनके गृहनगर जशपुर में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा.

जूदेव किडनी और लीवर में संक्रमण की वजह से पिछले 45 दिनों से दिल्ली से सटे गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती थे. उनके निधन के बाद छत्तीसगढ़ में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है. भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने जूदवे के निधन पर शोक जताया है.

जूदेव के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार दिलीप सिंह जूदेव के निधन की ख़बर मिलने के बाद उनकी पत्नी माधवी सिंह जूदेव ने ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

अस्त हो गया छत्तीसगढ़ की राजनीति का धूमकेतू

कट्टर हिंदू नेता

Image caption जूदेव की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की थी.

आठ मार्च 1949 को जन्मे दिलीप सिंह जूदेव की छवि एक कट्टर हिंदू नेता के तौर पर थी. 1975 में जशपुर नगरपालिका से अध्यक्ष बन कर सत्ता की राजनीति में आए दिलीप सिंह जूदेव ने 1988 में पहली बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन सिंह के ख़िलाफ़ खरसिया से विधानसभा चुनाव लड़ा था. हालांकि वे यह चुनाव हार गए थे.

दिलीप सिंह जूदेव 1989 से 91 तक लोकसभा के सदस्य रहे और बाद में 1992 से 98 तक राज्यसभा के सदस्य रहे. एनडीए सरकार में वे वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री के पद पर भी रहे. इस समय वे बिलासपुर से सांसद थे.

'धर्मांतरण' के ख़िलाफ़ 'ऑपरेशन घर वापसी' चलाने वाले दिलीप सिंह जूदेव का संबंध जशपुर राजघराने से था.

'वीसी शुक्ल को नहीं भूल सकते'

'पैसा ख़ुदा तो नहीं....'

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और ओडीशा में उन्होंने हज़ारों आदिवासियों को हिंदू धर्म में लाने के लिए कई सालों तक अभियान चलाया था. अपनी ख़ास क़िस्म की जीवनशैली और भाषण देने के कारण नौजवानों में वे बेहद लोकप्रिय थे.

छत्तीसगढ़ की राजनीति में उन्हें भाजपा के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रचारित किया गया था. लेकिन नवंबर 2003 में एक स्टिंग ऑपरेशन में उन्हें “पैसा ख़ुदा तो नहीं पर ख़ुदा से कम भी नहीं” कह कर कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए कैमरे में दिखाया गया था. इस घटना के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था और ज़ाहिर तौर पर मुख्यमंत्री पद की उनकी दावेदारी भी ख़त्म हो गई थी. यह मामला अभी अदालत में है.

उनके परिवार मे पत्नी और तीन पुत्र एवं एक पुत्री है. उनके एक बेटे युद्धवीर सिंह छत्तीसगढ़ में विधायक और संसदीय सचिव हैं.

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