हाल ही में अपग्रेड होकर लौटी थी सिंधुरक्षक

मुंबई में नौसेना की गोदी में धमाके का शिकार हुई पनडुब्बी आईएनएस सिंधुरक्षक को 16 साल पहले भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और इसका हाल ही में आधुनिकीकरण किया गया था.

सिधुघोष श्रेणी की इस डीज़ल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी को रूस में बनाया गया था और 24 दिसंबर 1997 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था.

भारत ने 1986 से 2000 के बीच किलो क्लास की ऐसी दस पनडुब्बियां रूस से हासिल की थी.

आईएनएस सिंधुरक्षक के बैट्री कम्पार्टमेंट में फरवरी 2010 में आग लगी थी जिसमें एक नौसैनिक मारा गया था. तब यह पनडुब्बी विशाखापट्टनम में नौसेना गोदी में तैनात थी.

उसी साल इसे उन्नत बनाने के लिए रूस भेजा गया. ज़्वेजदोच्का गोदी में दो साल तक चली मरम्मत के दौरान इसमें कई आधुनिक प्रणालियां जोड़ी गईं थीं.

क्रूज़ मिसाइल

आईएनएस सिंधुरक्षक को क्लब एस क्रूज़ मिसाइलों से सुसज्जित किया गया जो 200 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हैं.

साथ ही इसमें भारत और विदेश में विकसित दस नई प्रणालियों को भी जोड़ा गया था जिनमें यूएसएचयूएस हाइड्रो एकॉस्टिक सोनार सिस्टम और सीएसएस एमके-2 रेडियो कम्यूनिकेशन सिस्टम शामिल था.

अधिकारियों के मुताबिक़ इसे उन्नत बनाने में आठ करोड़ डॉलर का खर्च आया था.

इसके इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम और इंटिग्रेटेड वेपन कंट्रोल सिस्टम को भी अपडेट किया गया था.

नौसेना की ताकत

भारत के पास किलो क्लास में सिंधुरक्षक के अलावा सिंधुघोष, सिंधुध्वज, सिंधुरत्न, सिंधुवीर, सिंधुकेसरी, सिंधुकीर्ति, सिंधुविजय, सिंधुराज और सिंधुराष्ट्र पनडुब्बियां हैं.

7.2 मीटर लंबी सिंधुरक्षक पनडुब्बी भारतीय नौसेना की ताकत का एक अहम हिस्सा है. यह समुद्र के अंदर 640 किलोमीटर तक जा सकती है.

2300 टन वजन वाली पनडुब्बी की कीमत करीब 490 करोड़ रुपये है.

सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियां समुद्र में 300 मीटर की गहराई तक गोता लगा सकती हैं. इनकी अधिकतम रफ्तार 18 समुद्री मील है और ये चालक दल के 53 सदस्यों के साथ 45 दिन तक समुद्र में रह सकती हैं.

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