क्यों हो रही है नरेन्द्र मोदी को पीडा़?

अभी तक माना जाता था कि सोशल मीडिया पर मोदी ब्रिगेड का वर्चस्व है, जो किसी भी विरोधी विचारों को दबाने के लिए मधुमक्खी के झुंड की तरह टूट पड़ते हैं, लेकिन आज पहली बार सोशल मीडिया को लेकर नरेन्द्र मोदी की पीड़ा दिखाई दी.

लाल किले की ऐतिहासिक प्राचीर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के देश के नाम संबोधन के ठीक बाद नरेन्द्र मोदी ने भुज के लालन कॉलेज से अपने जवाबी भाषण में कहा कि सोशल मीडिया पर कई लोग हैं जिनके लिए "मोदी के बाहर कोई दुनिया नहीं है" और लगातार गालियाँ सुनने से उन्हें काफी पीड़ा होती है.

मोदी ने कहा कि आज जब देश तिरंगा लहरा रहा है, तो कंप्यूटर पर कांग्रेस ने एक फौज बैठा दी है. उन्होंने कहा, "वो कंप्यूटर पर बैठकर मोदी को कैसे गाली दी जाए, इसी में व्यस्त है. कम से कम आज आज़ादी के पर्व पर तो तिरंगे के सामने सिर झुका देते."

मोदी ने कहा कि "लेकिन उनके लिए मोदी से बाहर कोई दुनिया नहीं है. उनकी दुनिया मोदी में सिमट गई है और इसलिए पीड़ा होती है."

प्रधानमंत्री के भाषण का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि "देश रटी-रटाई बातें सुनकर थक गया है और अब सोचना चाहिए कि सहन शक्ति की सीमा क्या है. हम कब तक सहते रहेंगे इसकी व्याख्या होनी चाहिए."

उन्होंने कहना था कि, "देश आजाद हुआ, लेकिन सभी सपने पूरे हुए क्या? क्या ये सच नहीं कि हम अभी भी मानसिक गुलामी के शिकार हैं?"

मोदी ने कहा कि गुलामी की इस मानसिकता से मुक्ति पाए बिना देश तरक्की नहीं कर सकता है.

सहने की सीमा

Image caption नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के सहन करने की भी एक सीमा होनी चाहिए.

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि लाल किला पाकिस्तान को ललकारने की जगह है, ऐसा मैं नहीं मानता, लेकिन लाल किले से देश की सेना का मनोबल बढ़ाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि "सहन शक्ति की सीमा क्या है? हम कब तक सहते रहेंगे इसकी व्याख्या होनी चाहिए. सवाल सिर्फ पाकिस्तान का नहीं है, चीन ने क्या किया?"

मोदी ने कहा कि ऐसे वक्त जब चीन भारत की सीमाओं पर "अड़ंगा डाल रहा है और देश चुपचाप देखता हो तो चिंतित होनी लाजिमी है".

परिवारवाद

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के भाषण में सिर्फ नेहरू-गांधी परिवार का जिक्र करने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने भाषण में सिर्फ एक परिवार का जिक्र ही क्यों किया?

मोदी के मुताबिक , "क्या अच्छा नहीं होता कि वहां से लाल बहादुर शास्त्री और पटेल का जिक्र किया जाता?"

उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि, "लाल बहादुर शास्त्री ने भारत के किसानों को प्रेरणा दी थी. इसमें राजनीति या परिवारवाद नहीं होना चाहिए. आपने ऐसा क्यों किया?"

उन्होंने आगे कहा कि, "लाल बहादुर शास्त्री और पटेल जिन्होंने कांग्रेस के लिए जीवन खपाया था, उनका जिक्र न हो तो पीड़ा होती है."

संसद में गतिरोध

Image caption मोदी ने कहा कि सरकार में बैठे लोग और उनके परिवार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं.

संसद में गतिरोध पर मोदी ने कहा कि "विरोधी दल अपनी आवाज उठाने के लिए कोशिश करे ये तो समझ में आता है, लेकिन इस देश में पहली बार शासक दल लोकसभा की कार्रवाई में बाधा डाल रहा है इसलिए चिंता बड़ी हो जाती है."

उन्होंने देश के नाम राष्ट्रपति के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि "राष्ट्रपति की चिंताओं का जवाब प्रधानमंत्री जवाब नहीं दे सके हैं."

भ्रष्टाचार के मुद्दे के उठाते हुए मोदी बोले कि "आज देश भ्रष्टाचार से तबाह हो रहा है. सरकार में बैठे लोग, उनके परिवार के लोग इसमें लिप्त पाए जा रहे हैं, और सुप्रीम कोर्ट अगर आंखे लाल न करे तो कोई कार्रवाई नहीं होती."

निराशा

नरेंद्र मोदी ने खाद्य सुरक्षा बिल में कई कमियाँ गिनाईं औऱ कहा कि उन्होंने इस बिल का विरोध नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि "आप उसकी चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हो, दिल्ली की सरकार में बैठे लोग गरीब की खाली थाली में एसिड छिड़क रहे हैं."

मोदी ने इस विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि "हमने आपसे सवाल पूछा कि क्या कोई नया फायदा होने वाला है? सभी राज्य खाद्यान्न में सब्सिडी देते हैं. आज गुजरात में बीपीएल (गरीबी की रेखा से नीचे) परिवार को 35 किलो अन्न मिलता है, इस विधेयक के बाद यह 25 हो जाएगा. इसलिए हमने फूड सिक्योरिटी बिल के लिए मुख्यमंत्रियों की बैठक की मांग की है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार