'नियंत्रण रेखा पर पिछले 10 साल से ज़्यादा इस साल फायरिंग'

भारत और पाकिस्तान के बीच नवंबर में युद्ध विराम के 10 साल पूरे हो जाएंगे.

भारतीय सेना ने दावा किया है कि नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से जितनी फ़ायरिंग इस साल अब तक हुई है उतनी पिछले 10 साल में नहीं हुई थी.

पिछले कुछ दिनों से भारत और पाकिस्तान दोनों एक दूसरे पर नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करने का आरोप लगा रहे हैं.

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर कहते हैं, "भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक नियंत्रण रेखा पर अब जितनी लगातार और जितनी तीव्रता से गोलीबारी हो रही है, उतनी पिछले 10 साल में नहीं हुई.

ख़ास तौर पर छह अगस्त को जब भारतीय सेना ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसकर पांच भारतीय सैनिकों की हत्या की है तब से फ़ायरिंग थमने का नाम ही नहीं ले रही."

रियाज़ मसरूर के मुताबिक, "भारत और पाकिस्तान के बीच 26 नवंबर 2003 को युद्ध विराम हुआ था और तब दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच एक समझौता हुआ था कि युद्ध विराम नियंत्रण रेखा पर भी लागू होगा."

रियाज़ कहते हैं, "इस युद्ध विराम से 40-45 साल के बाद वहां ज़िंदगी एक बार फिर शुरू हुई थी क्योंकि तब तक फ़ायरिंग की वजह से वहां लोग खेतीबाड़ी नहीं करते थे."

'घुसपैठ की कोशिश नाकाम'

Image caption भारत ने आरोप लगाया था कि 6 अगस्त को पाकिस्तानी सैनिकों ने भारत के 5 सैनिकों की हत्या की.

इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी है कि भारतीय सेना ने रविवार को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ामें नियंत्रण रेखा के नज़दीक चरमपंथियों की घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी.

पीटीआई ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से बताया है, "रविवार सुबह लगभग ढाई बजे कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर सेना ने हथियारबंद चरमपंथियों को देखा. सेना ने चरमपंथियों को चुनौती दी जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी हुई."

इस अधिकारी ने ये भी बताया है कि गोलीबारी लगभग तीन घंटे चली और लगता है कि चरमपंथी नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में चले गए. अधिकारी ने कहा कि सेना उस इलाके में तलाशी कर रही है.

पीटीआई के मुताबिक इस साल जून से घुसपैठ के मामले लगातार बढ़े हैं.

मानवीय संकट का डर

बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर कहते हैं कि नियंत्रण रेखा पर हो रही गोलीबारी अगर जारी रहती है तो इससे मानवीय संकट भी पैदा हो सकता है.

वे बताते हैं, "नियंत्रण रेखा के करीब रह रही आबादी में लड़ाई का डर है क्योंकि ये रेखा 'नो मैन्स लैंड' नहीं है, यहां ज़िंदगी है. ये रेखा 740 किलोमीटर लंबी और 34 किलोमीटर चौड़ी है और यहां कई गांव बसे हैं.

इसलिए लोगों में डर है कि अगर युद्ध विराम टूट गया और दोनों सेनाओं ने फिर से गोलीबारी शुरू कर दी तो फिर खेतीबाड़ी ख़त्म हो जाएगी, स्कूल बंद हो जाएंगे, और काफ़ी नुकसान होगा.

हमीरपुर इलाके के निवासियों ने खेतों में बीज बो रखे हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे खेतीबाड़ी करे या नहीं. क्योंकि अगर गोलीबारी जारी रही तो वे लोग कहीं और जाने पर मजबूर हो जाएंगे."

भारतीय सेना के सूत्रों का कहना है कि अभी तक गोलीबारी में हल्के हथियारों का इस्तेमाल हुआ है लेकिन सेना को पूरी तरह से तैयार रखा गया है और नियंत्रण रेखा पर अलर्ट जारी कर दिया गया है.

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