'आन्दोलनकारी' हैं, नहीं मिलेगी कोलकाता में टैक्सी परमिट

Image caption पश्चिम बंगाल सरकार के नए फ़ैसलों पर ऐतराज जताने के लिए टैक्स मालिकों ने राज्य के परिवहन मंत्री मदन मित्र से भेंट की.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में अब सिर्फ उन टैक्सियों को ही नया परमिट जारी किया जाएगा जिनके मालिक यह हलफ़नामा देंगे कि वह भविष्य में किसी आंदोलन या हड़ताल में शामिल नहीं होंगे.

नए परमिट जारी करने के लिए ममता बनर्जी सरकार ने जो दिशानिर्देश तय किए हैं, उसमें इस बात का ज़िक्र है.

इसके अलावा सरकार ने महानगर की पहचान रही पीली टैक्सियों का रंग बदल कर उनको नीले और सफ़ेद रंग में रंगने का भी फ़ैसला किया है.

महानगर में एंबेसडर टैक्सियों का वर्चस्व तोड़ने के लिए सरकार दूसरी कंपनी की कारों को टैक्सी के तौर पर परमिट देने का फ़ैसला कर चुकी है. हालांकि, यह परमिट उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जिनमें कम से कम पांच लोग बैठ सकते हों.

टैक्सी मालिकों ने सरकार के इस निर्देश को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी आलोचना की है. इस मसले पर टैक्सी मालिकों और सरकार के बीच बातचीत भी हुई है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है.

एक प्रधानमंत्री जो टैक्सी भी चलाते हैं

नया दिशानिर्देश

Image caption टैक्सियों के पीले रंग को बदल कर नीला और सफेद करने का फैसला किया गया है.

परिवहन मंत्री मदन मित्र कहते हैं, 'हमने कोलकाता में चलने वाली टैक्सियों का रंग पीले से बदल कर उनको नीले और सफ़ेद रंग में रंगने का फ़ैसला किया है. इसके अलावा अब टैक्सी मालिकों को नया परमिट लेने के लिए यह हलफ़नामा देना होगा कि वह आगे से किसी आंदोलन या हड़ताल में शामिल नहीं होंगे.'

ममता सरकार जल्द ही चार हज़ार नई टैक्सियों के लिए परमिट जारी करेगी. इनमें से दो हज़ार परमिट वातानुकुलित टैक्सियों को दिए जाएंगे.

मित्र कहते हैं कि नई टैक्सियों पर उनके रजिस्ट्रेशन नंबर के अलावा यह लिखना अनिवार्य होगा कि वह वातानुकूलित हैं या नहीं. उन पर 'नो रिफ़्यूजल' भी लिखा रहेगा यानी उनके ड्राइवर किसी यात्री को ले जाने से इंकार नहीं कर सकते.

ममता बनर्जी सरकार दो साल पहले सत्ता में आने के बाद से ही टैक्सियों का रंग बदलने का प्रयास करती रही है. पहले भी उसने एक बार इनका रंग बदलने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन तब टैक्सी मालिकों के भारी विरोध की वजह से मामला ठंढे बस्ते में चला गया था. अब नए परमिट जारी करने के लिए सरकार ने नई शर्तें लाद दी हैं.

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मालिकों का विरोध

टैक्सी मालिक सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने ताजा दिशानिर्देशों को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है.

बंगाल टैक्सी एसोसिएशन के अध्यक्ष विमल गुहा कहते हैं, 'किसी भी सरकार को किसी व्यक्ति के लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. नए परमिट जारी करने के लिए शर्तें थोपना अनुचित है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं.'

विमल गुहा का सवाल है कि पुरानी टैक्सियों का रंग बदलने के लिए खर्च होने वाली रकम कहां से आएगी.वह कहते हैं कि डीज़ल की कीमतों में हुई वृद्धि के बावजूद उस अनुपात में किराए नहीं बढ़े हैं. इससे मुनाफ़ा पहले ही कम हो गया है. अब पुरानी गाड़ी पर नया ख़र्च कहां से करेंगे?

Image caption नए नियमों के मुताबिक टैक्सी मालिक किसी हड़ताल या आन्दोलन में शामिल नहीं हो सकेंगे.

दूसरी ओर कुछ टैक्सी ड्राइवरों का कहना है कि नियम बनाना सरकार का अधिकार है. वह जैसा नियम बनाएगी, उसका पालन तो करना ही होगा.

हावड़ा में टैक्सी चलाने वाले सुनील झा कहते हैं, 'टैक्सी पीली हो या नीली, हमें तो चलाने से मतलब है. हां, मालिकों को इससे दिक्कत हो सकती है.'

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आम लोगों की राय

इस मुद्दे पर आम लोगों का राय मिलीजुली है. टालीगंज इलाके के अजित सरकार कहते हैं, 'बदलाव संसार का शाश्वत नियम है. कई दशकों से यहां सिर्फ पीले रंग की टैक्सियां ही चलती रही हैं. अब बदलाव से कुछ नयापन आएगा.'

रिटायर्ड शिक्षक सोमेश्वर भट्टाचार्य की राय में महानगर की पहचान से छेड़छाड़ उचित नहीं है.

वह कहते हैं, 'पीली टैक्सियां कोलकाता की पहचान से जुड़ी हैं. इनका रंग बदलने की कवायद बेमतलब है. सरकार को दूसरे ज़रूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.'

सरकार और टैक्सी मालिकों के बीच एक दौर की बैठक के बावजूद इस मुद्दे पर गतिरोध नहीं सुलझ सका है. अभी एकाध और बैठक होनी है.

परिवहन मंत्री कहते हैं कि आम लोगों की सहूलियत को ही ध्यान में रखते हुए सरकार ने नए नियम तय किए हैं. यानी सरकार ने महानगर की एक पहचान का रंग बदलने का फ़ैसला कर ही लिया है.

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