भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार हुई सुस्त

भारतीय अर्थव्यवस्था

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इस तिमाही में भारत की आर्थिक विकास की दर 4.4 प्रतिशत रही. विकास की यह दर पिछले चार सालों में सबसे कम है.

अप्रैल-जून 2013 तिमाही में खनन और निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय गिरावट आई है. इस तिमाही में कृषि क्षेत्र में भी गिरावट दर्ज की गई है जिसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है.

व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट और संचार, वित्त, बीमा, रियल एस्टेट, व्यावसायिक सेवा क्षेत्र में भी पिछले साल की तुलना में इस साल की तिमाही में गिरावट आई है.

पहली तिमाही के आर्थिक विकास दर के आंकड़ो पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय उद्योग जगत ने कहा है कि भारत सरकार को विकास दर में आ रही गिरावट को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए.

उद्योग जगत के अनुसार विकास दर में आ रही गिरावट के रुकने की कोई उम्मीद नहीं नज़र आ रही है क्योंकि निवेशकों का मनोबल अभी भी काफ़ी कम है.

नौकरियां ख़तरे में

उद्योग संगठन फिक्की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा, "विभिन्न चुनौतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को मुश्किलों का सामना कर पड़ रहा है. ज़ाहिर है कि इससे उबरने का कोई अचूक उपाय नहीं है लेकिन वर्तमान मुश्किल स्थिति से निकलने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी होगी."

एक दूसरे उद्योग संगठन एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "उद्योग जगत को डर है कि यदि विनिर्माण क्षेत्र को उबारने के लिए तत्काल कोई कदम नहीं उठाए गए तो लोगों की नौकरियां ख़तरे में पड़ जाएंगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार किदवई ने कहा कि भारत को आर्थिक सुधार की गति तेज करनी होगी ताकि विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा सके.

उधर इन ताज़ा आंकड़ों पर राय देते हुए सीआईआई के डॉयरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि अर्थव्यवस्था धीमेपन की चपेट में है.

चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होते रूपए, बाजार में कर्ज़ की कमी, तेज़ ब्याज और निवेश में हो रही देरी की वजह से ये धीमापन आया है.

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