भारत के पहले रक्षा उपग्रह जीसैट-7 का सफल प्रक्षेपण

  • 30 अगस्त 2013

भारत के पहले विशिष्ट रक्षा उपग्रह जीसैट-7 का शुक्रवार को फ्रेंच गुयाना के कौरू अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण कर दिया गया. इस उपग्रह से देश की समुद्री सीमा की निगरानी क्षमता में गुणात्मक सुधार आएगा.

जीसैट-7 को कौरू के अंतरिक्ष केंद्र से एरियन-5 रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया.

इस उपग्रह का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया है और भारतीय नौसेना सितंबर माह के आखिर से इसका लाभ ले सकेगी.

इस उपग्रह को रूक्मिणी नाम दिया गया है और इसे तैयार करने में 185 करोड़ रुपए की लागत आई है.

इसे मध्य सितंबर तक विषुवत रेखा से 36,000 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष की भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा.

वैज्ञानिक मामलों के विशेषज्ञ पल्लव बागला ने इस उपग्रह की ख़ूबियां बताते हुए कहा, "जीसैट-7 से भारत की नौसेना को सुरक्षित संचार में मदद मिलेगी. इससे भारतीय भूक्षेत्र और समुद्री सीमा पर नज़र रखी जा सकेगी."

उन्होंने बताया कि सेना की तरफ से संचार के लिए अपनी विशिष्ट प्रणाली की मांग लंबे समय से हो रही थी, जो अब पूरी हो रही है.

नौसेना के लिए मददगार

पल्लव बागला ने बताया कि यह उपग्रह अपनी जगह पर स्थिर रहकर काम करेगा. जो भी जहाज इसके दायरे में रहेगा, उससे इसका संपर्क बना रहेगा.

पूरे हिंद महासागर में नौसेना को अपने विभिन्न अंगों से सुरक्षित संचार में सहूलियत होगी.

इससे बाहर के उपग्रह और तकनीक पर भारत की निर्भरता में कमी आएगी साथ ही इससे नौसेना को अपनी गोपनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी.

अब तक यह तकनीक केवल अमरीका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के पास थी.

भारत छठां देश है. जो इस समूह में शामिल हो गया है.

इसका निर्माण 185 करोड़ की लागत से किया गया है. इसके लॉन्च में 470 करोड़ की लागत आई है.

इस उपग्रह का वज़न दो हज़ार पचास किलोग्राम है. इसके निर्माण में भारत में विकसित तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.

इस संचार उपग्रह से भारत अपने भूराजनैतिक हितों की सुरक्षा होगी और हिंद महासागर की सुरक्षा

पर भारत की पकड़ मजबूत हो जाएगी.

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