कहीं देखा है सांसदों को 'पीएम चोर हैं' चिल्लाते: मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज सदन के दोनों सदनों को संबोधित किया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नें देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिए लोगों को सोना कम खरीदने और पेट्रोल और डीज़ल का इस्तेमाल कम करने की सलाह दी है. शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों में देश की आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए मनमोहन सिंह नें स्वीकार किया कि चालू खाते के घाटे की वजह से इस तरह के हालात पैदा हुए हैं और सरकार इस घाटे को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है.

मनमोहन सिंह ने कहा, "विदेशी मुद्रा विनिमय बाज़ार मूल्यों की उछाल के लिए पहले से ही काफी कुख्यात रहा है."

रूपए के भाव में गिरावट की बात करते हुए मनमोहन सिंह का कहना था कि ये चिंता की बात ज़रूर है मगर भारत अकेला देश नहीं है जहाँ की मुद्रा में गिरावट देखी गई है. उन्होंने कहा कि ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की की मुद्रा में भी गिरावट हुई है.

उन्होंने सीरिया संकट सहित कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों को रूपए में गिरावट को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने आशा जताई कि जल्द रुपया इस स्थिति से उबरने में कामयाब हो जाएगा.

प्रधानमंत्री ने संसद को आश्वस्त करते हुए कहा, "सरकार और रिज़र्व बैंक रुपए को स्थिर करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं."

प्रधानमंत्री की मानें तो रूपए में गिरावट के बावजूद बैंकिंग क्षेत्र मज़बूत हुआ है और देश के पास विदेशी मुद्रा का प्रचुर भण्डार है.

उन्होंने आयात कम और निर्यात ज़्यादा करने पर बल दिया. इसके अलावा उन्होंने उम्मीद जताई कि अच्छे मॉनसून से हालात में सुधार आ सकता है.

उन्होंने आर्थिक हालात में सुधार लाने के लिए सभी राजनीतिक दलों के सहयोग की अपील भी की.

भाजपा का विरोध

Image caption पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री के बयान से हमें निराशा हुई है.

भारतीय जनता पार्टी नें प्रधानमंत्री के भाषण के विरोध में लोक सभा का बहिष्कार किया. पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री का भाषण पूरी तरह निराशाजनक रहा है.

पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के बयान में तथ्यों की कमी थी. उन्होंने चालू खाते की घाटे के लिए संयुक्त प्रगतिशील गटबंधन की सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया.

यशवंत सिन्हा का कहना था, "जब बाक़ी दुनिया आने वाले आर्थिक संकट से हमें आगाह कर रही थी तो सरकार इसे हल्के तौर पर ले रही थी. प्रधानमंत्री के बयान से हमें निराशा हुई है."

मगर मनमोहन सिंह का कहना था कि पिछले छह महीनों में अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए जो क़दम उठाए गए हैं उसके सकारात्मक नतीजे जल्दी ही सामने आएंगे.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूपीए सरकार ने जो आर्थिक सुधार अपनाए हैं वो उसपर क़ायम रहेगी और बिगड़ते आर्थिक हालात को सुधारने के लिए लाइसेंस-परमिट राज की व्यवस्था में नहीं लौटेगी.

मनमोहन सिंह ने कहा कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में जो सुधार आया है उसका कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ा है और भारत भी उनमें से एक है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.8 फीसदी से अधिक न होने देने के लिए हर संभव क़दम उठाएगी.

महंगाई को देश के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति कम हो रही है लेकिन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अभी भी ज़्यादा है जो चिंता का विषय है.

लोकसभा ही की तरह राज्य सभा में भी प्रधानमंत्री के बयान के दौरान सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई.

राज्य सभा में भाजपा नेता अरुण जेटली द्वारा की गई आलोचना के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, "आपने किसी और देश में ऐसा होते देखा है कि सांसद अध्यक्ष के आसन के पास जाकर चिल्लाएं कि प्रधानमंत्री चोर है."

प्रधानमंत्री के इस बयान के जवाब में अरुण जेटली ने कहा, "क्या आपने ऐसे किसी लोकतंत्र के बारे में सुना है जिसमें प्रधानमंत्री विश्वासमत प्राप्त करने के लिए वोट खरीदता है?"

अच्छी फसल से उम्मीद

Image caption भारतीय प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था की बदहाली के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में बोले.

मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई कि अच्छी बारिश की वजह से इस वर्ष अच्छी फसल होगी और सरकार महंगाई को आनेवाले समय में नियंत्रित करने में क़ामयाब होगी.

चालू खाते के संकट की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 278 अरब डॉलर का है जो कि आयात बिल को लंबे समय तक संभालने के लिए पर्याप्त है.

उन्होंने मुद्रा संकट के समाधान के लिए निर्यात बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया और कहा कि लोगों को सोने और पेट्रोलियम पदार्थों के उपभोग में कमी लानी चाहिए.

इससे पहले विपक्ष ने सरकार पर अर्थव्यवस्था की बिगड़ती सेहत को संभाल पाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था.

शुक्रवार को भी विपक्षी सदस्यों ने ये कहकर प्रधानमंत्री की आलोचना की कि ये वक्त समस्याएं गिनाने का नहीं बल्कि समाधान बताने का है और प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ऐसा कुछ भी नहीं कहा.

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