रुपये की मज़बूती के लिए तेल कंपनियों को दिए जाएंगे डॉलर

सीरिया में सैन्य कार्रवाई की आशंका और अमरीकी डॉलर के मुकाबले रुपये की तेज़ गिरावट के बाद रिज़र्व बैंक तीन तेल कंपनियों को भुगतान के लिए डॉलर बेचने जा रहा है. इससे तीनों कंपनियों को रोज़ाना की डॉलर जरूरतों से निपटने में मदद मिलेगी.

एक आकलन के अनुसार तेल कंपनियों का रोज़ाना तेल आयात खर्च करीब 300 डॉलर है.

दुनिया के तेल अनुबंध आमतौर पर अमरीकी डॉलर में होते हैं. भारतीय तेल कंपनियां आयात के भुगतान के लिएरुपयाबेचकर अमरीकी डॉलर खरीदती हैं.

रिज़र्व बैंक का इरादा मौजूदा हाल में तेल कंपनियों को फॉरेन एक्सचेंज मार्केट से दूर रखने का है. लिहाज़ा उन्हें बड़े पैमाने पर डॉलर मुहैया कराये जाएंगे ताकि रुपये को मज़बूती दी जा सके.

शायद ही मिले मज़बूती

भारतीय मुद्रा साल की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल है. वर्ष 2013 की शुरुआत के बाद रुपये में अमरीकी डॉलर की तुलना में 20 फीसदी गिरावट हुई है. हालांकि गुरुवार को रुपये में रिकार्ड गिरावट के बाद सुधार दिखा और डॉलर की तुलना में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई.

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे शायद ही भारतीय मुद्रा को मज़बूती मिल पाये.

ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी क्रेडिट एग्रीकोल में एशिया प्रमुख मितुल कोटेचा कहते हैं, ''भारतीय मुद्रा को मज़बूती देने के लिए अधिकारी जो नये उपाय तलाश रहे हैं उसमें ये उपाय शायद ही भारतीय रुपये गिरने से रोक पाये.''

रिज़र्व बैंक ने ताज़ा कदम सीरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की आशंका के मद्देनजर विश्व में तेल के बढ़ते दामों के बीच उठाया है.

तेल के बढ़ते दाम

सीरिया तेल के बड़े उत्पादकों में नहीं है लेकिन किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से तेल के मुख्य क्षेत्र मध्य-पूर्व में अस्थिरता की आशंका है.

बुधवार को अमरीका में कच्चे तेल के दाम मई 2011 के बाद 110.17 डॉलर प्रति बैरल के उच्चतम मूल्य स्तर तक पहुंच गये. बाद में दामों में मामूली गिरावट भी आई.

तेल के बढ़ते दाम खासकर भारत के लिए चिंता का विषय हैं.

भारत ज़रूरत का करीब 80 फीसदी तेल आयात करता है. हालात इसलिए ज्यादा मुश्किल हैं क्योंकि मुद्रा में गिरावट आ रही है.

अब आयात के लिए कहीं ज्यादा भुगतान करना होगा जिससे मौजूदा खाता घाटे और बढाएगा. फिलहाल भारत का आयात बिल निर्यात की कमाई से कहीं ज्यादा है.

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