सीरिया: हमले में जितनी देरी होगी, असद उतने ही 'मजबूत होंगे'

बराक ओबामा
Image caption बराक ओबामा सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप के लिए अब अमरीकी कांग्रेस में चर्चा चाहते हैं

सीरिया के एक विपक्षी गुट का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा संभावित सैन्य कार्रवाई में जितनी देरी करेंगे, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सेनाएं उतनी ही मज़बूत होंगी.

ओबामा का कहना है कि सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का फैसला अमरीकी कांग्रेस में विचार विमर्श के बाद ही किया जाएगा.

लेकिन सीरिया के विपक्षी गठबंधन सीरियन नेशनल कोअलिशन के प्रवक्ता लोउए साफ़ी ने इस फ़ैसले को अमरीका के 'नेतृत्व की विफलता' बताया है.

शनिवार को ओबामा का भाषण ख़त्म होते ही सीरिया की सरकारी सेना ने विपक्ष के कब्ज़े वाले हिस्सों में दोबारा से गोलाबारी की.

अमरीका का कहना है कि सीरिया की सेना ने पिछले महीने दमिश्क के पास रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया. लेकिन सीरिया की सरकार इन आरोपों से इनकार करती है.

अमरीका का कहना है कि 21 अगस्त को हुए इस रासायनिक हमले में 1,429 लोग मारे गए.

अमरीकी राष्ट्रपति कह चुके हैं कि सीरिया में रासायनिक हमला 'लक्ष्मण रेखा' है जिसके बाद अमरीका वहां हस्तक्षेप के लिए मजबूर होगा.

"ज़रूरी और सही"

शनिवार को बराक ओबामा ने कहा कि जो भी कार्रवाई होगी, वो सीमित होगी. उन्होंने ज़मीनी हमला करने की संभावना ख़ारिज की.

उन्होंने अमरीकी कांग्रेस को एक मसौदा भेजा है, जिसमें सीरिया की सरकार के खिलाफ़ बल प्रयोग की मंजूरी मांगी गई गई. बराक ओबामा सीरिया की सरकार को रासायनिक हमला करने से रोकने को "ज़रूरी और सही" मानते हैं.

अमरीकी कांग्रेस की अगली बैठक नौ सितंबर को होगी.

इसका मतलब यह है कि तब तक अमरीका की तरफ से सीरिया में कोई भी सैन्य अभियान नहीं चलाया जाएगा.

अरब जगत का रुख

Image caption मिस्र, जॉर्डन और लेबनान जैसे देश सीरिया संकट के राजनयिक हल की अपील कर रहे हैं

उधर, अरब देशों के विदेश मंत्री सीरिया पर अपने रुख पर चर्चा के लिए काहिरा में बैठक करेंगे.

अरब लीग ने पिछले महीने की शुरुआत में सीरिया की सरकार पर कथित रासायनिक हमला करने का आरोप लगाया था लेकिन वह खुले तौर पर सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन नहीं कर रहे हैं.

अमरीका लीग पर अपने रुख पर कायम बने रहने का दबाव डाल रहा है. सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, दोनों ने निजी तौर पर असद सरकार को हटाने को मंजूरी दी है

लेकिन अरब लीग के मिस्र और जॉर्डन और लेबनान जैसे सदस्य राजनयिक हल की अपील कर रहे हैं.

'लोगों को राहत'

बीबीसी के संवाददाता जेरेमी बोवेन ने सीरिया की राजधानी दमिश्क से बताया कि शहर में उन लोगों को राहत मिली है जो यह सोच कर घबरा रहे थे कि इस सप्ताहांत से अमरीकी हमले शुरू हो जाएंगे.

उनका कहना है कि इससे सरकार को कुछ सन्वेदनशील सैन्य उपकरण इधर-उधर करने का समय मिल जाएगा.

मुख्य विपक्षी दल के नेता लोउए साफ़ी सीएनएन से कहा, "हमें डर है कि कार्रवाई न होने से सरकार मज़बूत हो सकती है, साथ ही वह और भी गंभीर तरीक़े से दोबारा हमले कर सकते हैं."

शनिवार को व्हाइट हाउस में बराक ओबामा ने कहा था कि उन्हें लगता है कि सीरिया में हस्तक्षेप के बारे में बहस होनी ज़रूरी है.

Image caption संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षक जांच कर सीरिया से लौट आए हैं

अमरीकी कांग्रेस ने बराक ओबामा के इस क़दम का स्वागत किया है.

पुतिन की चेतावनी

इससे पहले ब्रिटेन की सरकार को सीरिया में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के प्रस्ताव पर संसद में बहुमत नहीं मिला था.

फ़्रांस भी सीरिया में सैन्य कार्रवाई का समर्थन करता है और वहां की संसद में इस मुद्दे पर बुधवार को बहस होनी है.

लेकिन शनिवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अमरीका को चुनौती दी कि वो सीरिया में विद्रोहियों के खिलाफ सरकार द्वारा रासायनिक हमले के सबूत पेश करे.

रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र में सीरिया पर लाए गए दो प्रस्तावों पर वीटो कर चुके हैं और वो वहां बाहरी हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं.

सीरिया के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश पश्चिम के किसी भी हमले से अपना बचाव करगा.

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