भारतीय अर्थव्यवस्था को उबार पाएंगे राजन?

रघुराम राजन
Image caption राजन का मीडिया ने फ़िल्मी स्टार की तरह स्वागत किया है, लेकिन क्या वे उम्मीद पर खरे उतरेंगे.

रघुराम राजन का भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नर बनना ख़राब दौर से गुज़र रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए उम्मीद की किरण माना जा रहा है. अपने कार्यकाल के पहले ही दिन बुधवार को उन्होंने बिल्कुल सही निशाना साधा और शायद इसी वजह से भारतीय तथा विदेशी मीडिया में उन्होंने ख़ासी सुर्ख़ियां बटोरीं.

भारतीय अर्थव्यवस्था पर नज़र रखने वालों का मानना है कि राजन के पास वो सब कुछ है जो मौजूदा अर्थव्यवस्था में जान फ़ूकने के लिेए चाहिए.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्स्प्रेस के भास्कर दत्ता लिखते हैं, ''आरबीआई के नए गवर्नर इस बात से पूरी तरह अवगत हैं कि क्या किया जाना चाहिए. उम्मीद है कि गवर्नर के बदलने से आरबीआई की नीतियों में भी बदलाव आएगा.''

एनडीटीवी की वेबसाइट भी लगभग वैसी हो सोच रखती है. उसने लिखा है, ''पूर्व में आईएमएफ़ के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके आरबीआई के नए गवर्नर राजन ने अपने पहले ही दिन कई सुझाव पेश किए जिसका भारतीय शेयर बाज़ार पर सकारात्मक असर साफ़ दिखा.''

अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है, "बाज़ार को जिसने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया वो राजन का आत्मविश्वास था, अपने पूर्वाधिकारी से बिल्कुल अलग जिनकी सारी चिंताएं मुद्रास्फीति रोकने को लेकर थीं और उसी कारण अर्थव्यवस्था में मंदी आई.''

द इकोनोमिक टाइम्स न्यूयॉर्क स्थित स्टर्न स्कूल ऑफ़ बिज़नेस के प्रोफ़ेसर विराल आचार्य के हवाले से लिखता है, ''रघुराम राजन की वैश्विक अर्थव्यवस्था की समझ उनकी तत्काल ज़िम्मेदारी से कहीं ज़्यादा है.''

विदेशी मीडिया

विदेशी मीडिया और समीक्षकों ने भी राजन की बहाली पर उनकी जमकर तारीफ़ की है लेकिन उन्होंने साथ ही साथ थोड़ी एहतियात भी बर्ती है.

विदेशी विश्लेषकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर ज़्यादा अटकलें लगाने से गुरेज़ किया है.

उनके अनुसार मौजूदा हालात में भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से उबारने के लिए राजन सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं लेकिन उन्होंने लोगों को ये भी सलाह दी है कि राजन कोई सुपरहीरो नहीं हैं.

Image caption भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले कुछ दिनों में अपने सबसे ख़राब दौर से गुज़र रही है.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, ''भारतीय अख़बारों ने रिज़र्व बैंक के नए गवर्नर की तारीफ़ के पुल बांध दिए हैं जो कि आमतौर पर बॉलीवुड स्टारों के लिए सुरक्षित रहता है. नए गवर्नर की छरहरी काया, उनकी लंबी दौड़ की आदत वग़ैरह-वग़ैरह......लेकिन ये सब शायद ज़्यादा दिनों तक नहीं चलेगा.''

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार अमरीकी फ़ेडरल रिज़र्व की तुलना में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के पास उतनी स्वतंत्रता नहीं है और भारतीय अर्थव्यवस्था की जो सबसे बड़ी मुश्किलें हैं वे सब राजन के नियंत्रण से बाहर हैं.

हॉंग कॉंग से प्रकाशित होने वाला साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट लिखता है, ''भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने जो चुनौतियां हैं, राजन अकेले उनका सामना नहीं कर सकते. अर्थव्यवस्था मंदी की शिकार है और चालू खाता घाटा बहुत अधिक है जिसके कारण इस साल भारतीय रूपए की क़ीमत में 16 फ़ीसदी की गिरावट देखी गई है.''

सिंगापुर में डीबीएस की अर्थशास्त्री राधिका राव ने अपने ग्राहकों को ई-मेल भेजा है जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में ज़िक्र करते हुए उन्होंने लिखा है, ''हाल ही में रूपए की गिरती क़ीमत और वित्तीय बाज़ार में उथल-पुथल बहुत हद तक विश्वास का संकट कहा जा सकता है और नए गवर्नर ने जो रास्ते सुझाए हैं उनका स्वागत किया जाना चाहिए.''

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