नब्बे के दशक में भारत?

क्या भारत आर्थिक रूप से 90 के दशक में चला गया है ?

बात हवाई यात्रा की हो या व्यापार की, विदेशी मुद्रा विनिमय की या कच्चे तेल की, हर ग्राफ गिरता जा रहा है.

भारत की ख़स्ता होती अर्थव्यवस्था की वजह घरेलू है या अंतरराष्ट्रीय हलचलों का असर है?

भारतीय रिज़र्व बैंक के नए गवर्नर की नियुक्ति के बाद भारतीय बाज़ार में थोड़ा उछाल देखा गया, रुपये की सेहत थोड़ी बेहतर हुई.

पर क्या ये सिर्फ दूध के उफ़ान की तरह है या इसका कोई दीर्घकालिक असर भी होगा?

आपकी ज़िंदगी बीते महीनों में कैसे प्रभावित हुई है?

क्या सरकार स्थिति से निपटने में नाकाम रही या इस मंदी से बचने का कोई उपाय ही नहीं था?

इस शनिवार सात सितबंर को बीबीसी इंडिया बोल में होगी इसी विषय पर चर्चा.

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