मुज़फ़्फरनगर में सेना ने संभाली कमान

  • 8 सितंबर 2013
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उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फरनगर में दो समुदायों के बीच संघर्ष में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. पूरे शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है.

इस बीच शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ज़िले की सुरक्षा व्यवस्था की कमान सेना ने अपने हाथ में ले ली. सेना की टुकड़ियों ने रविवार सुबह शहर में फ़्लैग मार्च किया.

मुज़फ़्फ़रनगर शहर के ज़्यादातर इलाक़ों में ख़ामोशी पसरी है. हिंसा की वजह से शहरी जनजीवन थम सा गया है और लोगों के बीच अफ़वाहें फैली हुई हैं.

अहतियातन प्रशासन ने आज सुबह अख़बार भी नहीं बंटने दिए. हालाँकि आठ बजे के बाद ग्रामीण इलाक़ों में भेजे जाने वाले अख़बारों को बाँटने की इजाज़त दे दी गई थी.

मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में दो अलग-अलग समुदायों के तीन युवकों की हत्या के बाद तनाव हो गया था. शनिवार को यहां एक पत्रकार समेत नौ लोगों की मौत हो गई थी.

ग्रामीण इलाक़ों में फैली हिंसा

इस बीच मुज़फ़्फ़रनगर के ग्रामीण इलाक़ों से हिंसा की नई वारदात की ख़बरें मिली हैं. इन्हें रोकना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है.

मुज़फ़्फ़रनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ पुरबालियान गांव में रविवार सुबह हुई ताज़ा हिंसा की वारदात में दो लोगों की मौत हो गई है.

उधर, एक अन्य गांव मंसूरपुर में भी दो पक्षों के बीच फ़ायरिंग हुई है. इसमें हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ है पर एक महिला ज़ख्मी हो गई है.

'बयानों से भड़की हिंसा'

इससे पहले आईजी क़ानून व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा ने बीबीसी से बातचीत में नौ लोगों की मौत की पुष्टि की थी.

आईजी विश्वकर्मा का कहना था, ''जनसभा में नेताओं ने बेहद गैरज़िम्मेदाराना बयान दिए गए, जिस कारण लोगों की भावनाएं भड़क गईं और हिंसा हुई.''

हालात को काबू में लाने के लिए 27 कंपनी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया. इसके साथ ही दंगाइयों को रोकने के लिए अधिकारियों को स्वविवेक से गोली चलाने के आदेश भी दिए गए हैं.

एडीजी के मुताबिक़ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुलिस बल बढ़ाया गया है. उनका कहना है कि हिंसा का इलाके के व्यवसाय पर असर हो रहा है.

महापंचायत

जानसठ क़स्बे के निकट नगला मदौड़ गाँव के इंटर कॉलेज के मैदान में शनिवार को विशाल महापंचायत हुई थी, जिसमें भारी तादाद में लोग शामिल हुए थे.

पुलिस के मुताबिक़ महापंचायत में शामिल होने आ रही भीड़ ने रास्ते में कथित रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

इससे पहले मुज़फ़्फ़रनगर-शामली मार्ग पर स्थित बसी गाँव में महापंचायत में जा रहे लोगों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के बीच झड़पें हुईं थीं, जिसमें कई लोग ज़ख्मी हो गए थे.

भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, भारतीय किसान यूनियन और खाप पंचायतों ने इस महापंचायत का आह्वान किया था.

अल्पसंख्यक समुदाय के युवक की हत्या की ख़बर के बाद मुज़फ़्फरनगर शहर में भी तनाव बन गया और शनिवार दोपहर बाद बाज़ार बंद हो गए थे.

मुज़फ़्फरनगर के अबुपुरा इलाक़े के लोगों के अनुसार वहां कवरेज कर रहे एक स्थानीय पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गई, जिसके बाद तनाव और बढ़ा. इससे पहले गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी ने मुज़फ़्फ़रनगर बंद का आह्वान किया था. इस दौरान भी पूरे शहर में सन्नाटा रहा.

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