उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

मायावती
Image caption मायावती ने सत्ताधारी समाजवादी पार्टी की कड़ी आलोचना की है

मुज़फ़्फरनगर में हुई हिंसा के लिए लगातार उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. जमीनी स्तर पर जहां हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, वहीं उन पर लगातार राजनीतिक हमले हो रहे हैं.

राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने अखिलेश यादव सरकार की आलोचना करते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है.

भारतीय जनता पार्टी ने मुज़फ़्फ़रनगर के हालात को लेकर राज्य की अखिलेश यादव सरकार की कड़ी आलोचना की है जबकि सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात ने दंगों के लिए भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया है.

अधिकारियों ने बताया है कि हिंसाग्रस्त मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है और अब तक 90 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

ज़िम्मेदारी

सोमवार को एक पत्रकार वार्ता में मायावती ने कहा, "मैं समाजवादी पार्टी की इस बात से सहमत नहीं हूँ कि इस हिंसा के पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ है क्योंकि ये घटना पिछले महीने की है. अगर राज्य सरकार गंभीर होती तो वो कुछ क़दम उठाती."

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "हालांकि पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश में जो कुछ हुआ है उसमें कुछ हद तक भाजपा और सपा की मिलीभगत है. कई बार दोनों पार्टियों ने घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की क्योंकि लोकसभा के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं."

उन्होंने कहा, "तनाव की घटनाओं ने अब ये साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में घोर अव्यवस्था का माहौल है और गंभीर संवैधानिक संकट है. सपा सरकार कानून व्यवस्था में विफल है और यहाँ जंगल राज है. हमने अपनी बात राज्यपाल को पहुँचा दी है. अब उनकी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे अपनी काम करें."

मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार को अपनी ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि प्रदेश के बिगड़ते हालात को देखकर वह दो-तीन महीने पहले राज्यपाल से मिली थीं लेकिन राज्यपाल ने इस मामले में चुप्पी साधे रखी.

मुज़फ़्फ़रनगर के कवाल गाँव में दो अलग-अलग समुदायों के तीन युवकों की मौत के बाद तनाव शुरू हुआ था, जिसने सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया.

'अखिलेश यादव की नाकामी'

Image caption अखिलेश पर हिंसा से निपटने में नाकाम रहने के आरोप लग रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के नेता रविशंकर प्रसाद ने मुज़फ़्फ़रनगर के हालात को राज्य की अखिलेश यादव सरकार की नाकामी बताया है.

उन्होंने कहा, “क्या कारण है कि जब मुज़फ़्फ़रनगर जल रहा है और मुलायाम सिंह यादव बैठक अपने घर पर बुलाते हैं. क्या मुलायम को अपने पुत्र की क्षमता पर संदेह है.“

दंगों के सिलसिले में कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए हैं.

उन्होंने कहा, “बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई हुई. लेकिन कानून अपना काम करेगा. हमारे कार्यकर्ता निर्दोष हैं. जानबूझ कर प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए प्रतिशोधात्मक कार्रवाई कर रहा है.”

उन्होंने कहा कि गुजरात के दंगों पर खूब बोलने वाले कांग्रेस के नेता और केंद्र के मंत्री मुज़फ़्फ़रनगर के मामले पर चुप क्यों हैं.

बीजेपी पर आरोप

लेकिन सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात ने मुज़फ़्फ़रनगर के हालात के लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक को जिम्मेदार बताया है. उनके अनुसार, "पिछले एक साल में उत्तर प्रदेश में बहुत सी सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं. लगता है कि बीजेपी और आरएसएस माहौल को गर्मा रहे हैं और मुज़फ़्फ़रनगर में भी यही हुआ है."

उन्होंने मुज़फ़्फ़रनगर के बिगड़े हालात के लिए राज्य सरकार के लचर प्रबंधन को भी जिम्मेदार बताया है.

राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव ने भी कहा है कि उनकी सरकार दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.

वो भी इस हिंसा को चुनाव से जोड़ते हैं.

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